सेवा संकल्प अभियान के तहत 200 से अधिक किसान खेतों की मेड़ से लेकर उपयुक्त स्थलों तक नारियल के पौधे लगायेंगे
धमतरी | छत्तीसगढ़ की जीवनदायिनी महानदी के तट पर बसे धमतरी जिले में अब हरियाली के साथ समृद्धि की एक नई कहानी लिखने की तैयारी है। खेतों की मेड़, बागवानी क्षेत्र और अन्य उपयुक्त स्थान आने वाले समय में नारियल के हरे-भरे वृक्षों से आच्छादित दिखाई देंगे। यह पहल केवल पौधरोपण तक सीमित नहीं है, बल्कि कृषि में विविधता लाने, किसानों की आय के अतिरिक्त स्रोत विकसित करने और पर्यावरण संरक्षण को आजीविका से जोड़ने की दिशा में एक दूरदर्शी प्रयास है।
सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत जिले के विभिन्न विकासखंडों के 202 कृषकों ने कुल 4,126 नारियल पौधे लगाने के लिए सहमति दी है। कृषकों की मांग और स्वीकृति के आधार पर नारियल बोर्ड, कोण्डागांव से पौध प्राप्त करने की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है। 23 सितंबर को संबंधित मैदानी अधिकारी कृषकों की सूची एवं आवश्यक प्रकरणों के साथ कोण्डागांव पहुंचकर निर्धारित प्रक्रिया के तहत पौध प्राप्त करेंगे। इसके बाद स्वीकृत संख्या के अनुरूप पौधों का कृषकवार वितरण किया जाएगा।
महानदी जागरूकता अभियान ने रखी थी मजबूत नींव
धमतरी में नारियल रोपण की यह पहल अचानक नहीं, बल्कि पर्यावरण और जनभागीदारी को केंद्र में रखकर किए जा रहे निरंतर प्रयासों की अगली कड़ी है। महानदी जागरूकता अभियान—MAA (Mahanadi Awakening Abhiyan) के अंतर्गत पिछले वर्ष जुलाई में फरसियां से गणेशघाट तक लगभग 14 किलोमीटर लंबी पट्टी में करीब 4,000 नारियल पौधों का वृहद रोपण किया गया था।
इस अभियान का शुभारंभ कलेक्टर श्री अबिनाश मिश्रा ने स्वयं नारियल पौधा रोपकर किया। जनप्रतिनिधियों, सरपंचों और बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने सहभागिता करते हुए पौधे लगाए। इस पहल ने यह संदेश दिया कि नदी संरक्षण और पर्यावरण संरक्षण तभी स्थायी बन सकते हैं, जब उन्हें जनजीवन और स्थानीय आजीविका से जोड़ा जाए।
नगरी की धरती पर नारियल की संभावनाएं
नगरी क्षेत्र की भौगोलिक एवं जलवायु परिस्थितियों को नारियल वृक्ष के लिए अनुकूल पाए जाने के बाद इसके विस्तार की संभावनाएं बढ़ी हैं। कृषि विज्ञान केंद्र एवं विशेषज्ञ संस्थानों के माध्यम से किए गए परीक्षणों से भी यहां नारियल रोपण की संभावनाओं को बल मिला है। ऐसे में किसान अपने खेतों, मेड़ों और घरों के आसपास उपलब्ध उपयुक्त स्थानों का उपयोग कर अतिरिक्त आय का आधार तैयार कर सकते हैं।
नारियल एक बहुवर्षीय फसल है। प्रारंभिक वर्षों में देखभाल की आवश्यकता के बाद यह लंबे समय तक उत्पादन देने वाली फसल बन सकती है। इससे किसानों को पारंपरिक फसलों के साथ एक अतिरिक्त और दीर्घकालीन आय का स्रोत विकसित करने का अवसर मिलेगा। खेत की ऐसी भूमि या मेड़, जिसका खेती में सीमित उपयोग होता है, वहां नारियल लगाकर किसान अपनी उपलब्ध कृषि परिसंपत्तियों का बेहतर उपयोग कर सकेंगे।
एक पौधा, अनेक संभावनाएं
नारियल को केवल फल देने वाला वृक्ष मानना इसके व्यापक महत्व को सीमित कर देना होगा। इसके फल, पानी, तेल, रेशा और अन्य उत्पादों का विभिन्न क्षेत्रों में उपयोग होता है। भविष्य में स्थानीय स्तर पर प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन और विपणन की गतिविधियों को बढ़ावा मिलने पर इससे ग्रामीण स्तर पर रोजगार और उद्यमिता के नए अवसर भी निर्मित हो सकते हैं।
इससे फसल विविधीकरण को बढ़ावा मिलेगा और किसानों की आय केवल एक या दो पारंपरिक फसलों पर निर्भर नहीं रहेगी। कृषि के साथ उद्यानिकी गतिविधियों का समावेश ग्रामीण अर्थव्यवस्था को अधिक विविध और टिकाऊ बनाने में सहायक हो सकता है।
सेमरा में तैयार हो रही भविष्य की पौधशाला
इस अभियान की दीर्घकालिक सफलता के लिए ग्राम सेमरा में नारियल नर्सरी की स्थापना की जा रही है। इससे आने वाले वर्षों में जिले में गुणवत्तापूर्ण पौधों की स्थानीय एवं सतत उपलब्धता सुनिश्चित करने की दिशा में मदद मिलेगी। स्थानीय स्तर पर पौध उपलब्ध होने से किसानों को समय पर रोपण सामग्री मिल सकेगी और नारियल क्षेत्र के क्रमिक विस्तार का मार्ग प्रशस्त होगा।
उद्यानिकी विभाग द्वारा किसानों को पौध रोपण के लिए उपयुक्त स्थान, पौधों के बीच दूरी, सिंचाई, पोषण प्रबंधन, पौध संरक्षण और प्रारंभिक देखभाल के संबंध में तकनीकी मार्गदर्शन भी दिया जाएगा।
हरियाली से समृद्धि तक
धमतरी में नारियल रोपण की यह पहल दरअसल ‘हरियाली से समृद्धि’ की अवधारणा को जमीन पर उतारने का प्रयास है। महानदी के तटों पर बढ़ती हरियाली, खेतों की मेड़ों पर खड़े नारियल के वृक्ष और किसानों के लिए विकसित होता अतिरिक्त आय का स्रोत—ये तीनों मिलकर आने वाले समय में जिले की ग्रामीण अर्थव्यवस्था की एक नई तस्वीर प्रस्तुत कर सकते हैं।
एक ओर नारियल के वृक्ष पर्यावरणीय संतुलन, हरियाली और नदी तटीय क्षेत्र की सुंदरता बढ़ाएंगे, वहीं दूसरी ओर इनके फलने-फूलने के साथ किसानों को दीर्घकालीन आर्थिक लाभ की संभावना मिलेगी। आज लगाया गया एक पौधा आने वाले वर्षों में परिवार की आय, गांव की हरियाली और क्षेत्र की समृद्धि का आधार बन सकता है।
इसी सोच के साथ धमतरी में नारियल रोपण को एक अभियान नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण, कृषि विविधीकरण और ग्रामीण समृद्धि के साझा संकल्प के रूप में आगे बढ़ाया जा रहा है।






