
सोशल मीडिया पर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी के खिलाफ थाने में ज्ञापन, ‘वनवासी’ शब्द के प्रयोग पर राष्ट्रपति के नाम सौंपा गया ज्ञापन
धमतरी। जिले में आदिवासी समाज की पहचान, सम्मान और संवैधानिक अधिकारों से जुड़े मुद्दों को लेकर सर्व आदिवासी समाज का विरोध तेज होता नजर आ रहा है। एक ओर सोशल मीडिया पर आदिवासी समाज के खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणी करने वाले व्यक्ति के विरुद्ध एफआईआर दर्ज करने की मांग उठाई गई है, वहीं दूसरी ओर आदिवासी समुदाय के लिए “वनवासी” शब्द के प्रयोग पर आपत्ति जताते हुए राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा गया है।
इंस्टाग्राम पर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी का विरोध
सर्व आदिवासी समाज, जिला धमतरी द्वारा कोतवाली थाना प्रभारी को सौंपे गए ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि “संस्कार” नामक व्यक्ति ने इंस्टाग्राम प्लेटफॉर्म पर आदिवासी समाज के संबंध में कथित रूप से अपमानजनक और समाज की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाली टिप्पणियां की हैं।
समाज के प्रतिनिधियों का कहना है कि इस प्रकार की टिप्पणियों से आदिवासी समाज की भावनाएं आहत हुई हैं और समाज के लोगों में व्यापक नाराजगी व्याप्त है। ज्ञापन में पुलिस प्रशासन से मामले की निष्पक्ष, पारदर्शी और त्वरित जांच कर दोषी के विरुद्ध तत्काल एफआईआर दर्ज करने तथा समयबद्ध तरीके से आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत कर कड़ी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की गई है।
साथ ही भविष्य में सोशल मीडिया के माध्यम से किसी भी जाति, वर्ग या समुदाय के विरुद्ध घृणा और वैमनस्य फैलाने वालों पर सख्त कार्रवाई की मांग भी की गई है, ताकि सामाजिक सौहार्द बना रहे।
‘वनवासी’ शब्द के प्रयोग पर जताई आपत्ति
इसी क्रम में सर्व आदिवासी समाज ने राष्ट्रपति के नाम एक अलग ज्ञापन भी सौंपा। ज्ञापन में आदिवासी समुदाय की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और संवैधानिक पहचान के सम्मान की मांग की गई है।
समाज का कहना है कि आदिवासी समुदाय की पहचान लंबे समय से “आदिवासी” के रूप में स्थापित रही है। हाल के दिनों में केंद्रीय गृह मंत्री द्वारा आदिवासी समाज के संदर्भ में “वनवासी” शब्द के उपयोग को लेकर समाज के विभिन्न वर्गों में असंतोष और चिंता व्याप्त है।
ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि किसी भी समुदाय की पहचान उसी नाम और स्वरूप में सम्मानित की जानी चाहिए, जिसे वह समुदाय स्वयं स्वीकार करता हो और जो उसकी ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक विरासत को प्रतिबिंबित करता हो।
संवाद और सम्मान की मांग
सर्व आदिवासी समाज ने मांग की है कि आदिवासी समुदाय की संवैधानिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान का सम्मान सुनिश्चित किया जाए। साथ ही समुदाय से जुड़े विषयों पर प्रतिनिधियों, बुद्धिजीवियों और सामाजिक संगठनों के साथ संवाद स्थापित किया जाए तथा भविष्य में सार्वजनिक वक्तव्यों में आदिवासी समाज की भावनाओं का विशेष ध्यान रखा जाए।
ज्ञापन में केंद्र और राज्य सरकारों से आदिवासी समाज के अधिकारों, संस्कृति और अस्मिता के संरक्षण के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग की गई है। साथ ही केंद्रीय गृह मंत्री से आदिवासी समाज की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग भी रखी गई है।
लोकतांत्रिक तरीके से उठाई जा रही मांगें
सर्व आदिवासी समाज के पदाधिकारियों ने कहा कि आदिवासी समुदाय की पहचान, सम्मान और संवैधानिक अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर समाज एकजुट है और लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक माध्यमों से अपनी बात शासन-प्रशासन तक पहुंचा रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि प्रशासन और सरकार दोनों ही मामलों में गंभीरता से संज्ञान लेकर आवश्यक कार्रवाई करेंगे।
बड़ी संख्या में समाजजन रहे उपस्थित
ज्ञापन सौंपने के दौरान जिलाध्यक्ष जीवराखन मरई, महेश रावटे, जयपाल सिंह ठाकुर, उदय नेताम, गेवाराम नेताम, सुभाष कतलम, कांशीराम छैदेया, श्यामलाल नेताम, शिव नेताम, संतोष ध्रुव, नरसिंह मंडावी, हरिराम नेताम, भागी ध्रुव, नंदा ध्रुव, चमेली नेताम, भाविका ध्रुव, बालक नेताम, टीकम ध्रुव, खिलेन्द्र ध्रुव, मोहन ध्रुव, रामेश्वर मरकाम, हर्ष मरकाम, सत्यवान पडोटी, तिजेंद्र ध्रुव, बंटी मरकाम, बसंत नेताम, नंदकिशोर नेताम, लेखराम नेताम सहित बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित रहे।






