नौ वर्षीय लावण्या को मिला कैलिपर, बेटी को अपने पैरों पर चलता देख माता-पिता की आंखें खुशी से हुईं नम
धमतरी । किसी बच्चे के लिए अपने पैरों पर चलना और दूसरे बच्चों के साथ खेलना सामान्य बात हो सकती है, लेकिन नौ वर्षीय लावण्या साहू और उसके परिवार के लिए यह किसी सपने के साकार होने जैसा पल था। बचपन से पैरों में तकलीफ के कारण चलने-फिरने में परेशानी का सामना कर रही लावण्या को सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत आयोजित जिला स्तरीय ‘निदान-03’ विशेष शिविर में नई उम्मीद मिली। शिविर में उसके पैरों का माप लेकर कैलिपर उपलब्ध कराया गया। कैलिपर की सहायता से जब लावण्या ने अपने नन्हे कदम आगे बढ़ाए, तो बेटी को अपने पैरों पर खड़ा और चलते देख माता-पिता की आंखें खुशी से छलक उठीं।
राजिम के ग्राम खर्रा निवासी लावण्या साहू के पिता हेमंत कुमार साहू और माता क्षत्रिका साहू की हमेशा यही इच्छा रही कि उनकी बेटी भी दूसरे बच्चों की तरह चल-फिर सके, उनके साथ खेल-कूद सके और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़े। बेटी की परेशानी को देखते हुए माता-पिता के मन में उसकी भविष्य की चिंता बनी रहती थी। उनके लिए बेटी का अपने पैरों पर खड़ा होना केवल शारीरिक सहारे की बात नहीं, बल्कि उसके बेहतर भविष्य से जुड़ा एक सपना था।
‘निदान’ शिविर बना उम्मीद की नई किरण
जिला प्रशासन, समाज कल्याण विभाग और भगवान महावीर दिव्यांग सेवा समिति के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित ‘निदान-03’ शिविर में लावण्या के परिवार को उनकी इसी चिंता का समाधान मिला। शिविर में विशेषज्ञ टीम ने लावण्या की स्थिति का आकलन कर उसके पैरों का माप लिया और कैलिपर उपलब्ध कराया। इस सहायक उपकरण से लावण्या को चलने-फिरने में मदद मिलने की उम्मीद जगी।
कैलिपर लगने के बाद लावण्या के नन्हे कदमों ने उसके परिवार के चेहरे पर खुशी बिखेर दी। बेटी को आगे बढ़ते देख माता-पिता के लिए वह पल भावुक कर देने वाला था। वर्षों से मन में संजोई इच्छा पूरी होने की दिशा में बढ़ते इस कदम ने पूरे परिवार को नई आशा और विश्वास दिया।
सहायक उपकरण से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़े कदम
लावण्या के पिता हेमंत कुमार साहू ने इस सहयोग के लिए जिला प्रशासन, समाज कल्याण विभाग और भगवान महावीर दिव्यांग सेवा समिति के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि शिविर के माध्यम से उनकी बेटी को मिला कैलिपर उसके जीवन को सुगम बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण सहयोग है। इससे परिवार को उम्मीद मिली है कि लावण्या आगे चलकर अधिक आत्मविश्वास के साथ अपनी दैनिक गतिविधियां कर सकेगी।
‘निदान-03’ शिविर का उद्देश्य दिव्यांगजनों को उनकी जरूरत के अनुरूप सहायक उपकरण एवं आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराकर उनके जीवन को सुगम बनाना, आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ना है। शिविर में लावण्या को मिला कैलिपर इसी उद्देश्य की एक प्रेरक मिसाल है।
लावण्या की कहानी बताती है कि समय पर मिलने वाला सहयोग किसी परिवार के जीवन में कितनी बड़ी खुशी ला सकता है। उसके नन्हे कदम अब केवल आगे बढ़ने का प्रयास नहीं, बल्कि उम्मीद, आत्मविश्वास और बेहतर भविष्य की ओर बढ़ते कदम हैं। ‘निदान’ शिविर ने लावण्या और उसके परिवार को यह विश्वास दिया है कि संवेदनशील पहल और उचित सहायता से दिव्यांग बच्चों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है।
