स्वयं गाया ‘हम होंगे कामयाब’, बच्चों ने भी सुर में सुर मिलाया; स्नेह, प्रेरणा और आत्मीयता से भरा रहा मिलन
धमतरी | मध्यप्रदेश के निवाड़ी जिले के पृथ्वीपुर अंचल में ‘लाल बहिनजी’ के नाम से विख्यात, शिक्षा और समाजसेवा के क्षेत्र में विशिष्ट पहचान रखने वालीं 90 वर्षीय श्रीमती इलीशिबा नाथ ने अपने जीवन के 90वें वर्ष की खुशियां सार्थक स्कूल, धमतरी के विशेष बच्चों के बीच मनाईं। अपने बेटे आलोक नाथ, बेटियों अर्चना नेताम एवं अंजना लाल, दामाद आर.एन. लाल, नाती आयुष और बहू उदिता के साथ सार्थक पहुंचीं इलीशिबा जी ने बच्चों के बीच जिस सहजता, आत्मीयता और उत्साह से समय बिताया, उसने इस मुलाकात को एक यादगार और प्रेरणादायक अवसर बना दिया।
इस मुलाकात का सबसे भावपूर्ण क्षण तब आया, जब इलीशिबा जी ने स्वयं बच्चों के बीच ‘हम होंगे कामयाब’ गीत गाना शुरू किया। उनके स्वर में स्वर मिलाते हुए बच्चे भी पूरे उत्साह से गाने लगे। 90 वर्ष की उम्र में उनका यह जीवंत अंदाज, संगीत के प्रति अनुराग और बच्चों के साथ सहज जुड़ाव सभी के लिए सुखद अनुभव रहा। गीत के शब्दों के साथ बच्चों के चेहरों पर झलकता आत्मविश्वास और खुशी इस बात का सुंदर संदेश दे रहे थे कि हौसला, उम्मीद और सकारात्मकता की कोई उम्र नहीं होती।
संघर्ष, शिक्षा और समाजसेवा से बना प्रेरक व्यक्तित्व
श्रीमती इलीशिबा नाथ का जीवन शिक्षा, संघर्ष और सामाजिक सरोकारों को समर्पित रहा है। मध्यप्रदेश के निवाड़ी जिले के पृथ्वीपुर क्षेत्र में उन्होंने लंबे समय तक शिक्षा के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दीं और हेडमिस्ट्रेस के पद से सेवानिवृत्त हुईं। वर्तमान में वे बिलासपुर, छत्तीसगढ़ में निवासरत हैं।
अपने समय में दो विषयों में एम.ए. की उपाधि प्राप्त करना और साथ ही प्रयागराज विश्वविद्यालय से संगीत में डिप्लोमा हासिल करना उनकी असाधारण लगन, प्रतिभा और दृढ़ इच्छाशक्ति का परिचायक है। उन्होंने कठिन परिस्थितियों और संघर्षों के बीच अपनी शैक्षणिक एवं सांगीतिक रुचियों को आगे बढ़ाया। स्वर्गीय श्री योहन नाथ एवं श्रीमती इलीशिबा नाथ का संपूर्ण जीवन समाज की भलाई और दूसरों के लिए कुछ करने की भावना से जुड़ा रहा। उनके संस्कारों और जीवन मूल्यों की सुंदर झलक आज उनके परिवार में भी दिखाई देती है। उनकी तीनों बेटियां, दामाद, बेटा, बहू तथा पोते-नाती विभिन्न पदों और संस्थानों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
बच्चों की प्रतिभा और सीखने की प्रक्रिया को समझा
सार्थक में परिवार के सदस्यों ने बच्चों की गतिविधियों, उनकी सीखने की प्रक्रिया, स्वास्थ्य संबंधी आवश्यकताओं और संस्था में संचालित प्रशिक्षण कार्यों को बड़ी रुचि एवं संवेदनशीलता से समझा। उन्होंने बच्चों के साथ बातचीत की, उनकी प्रतिभाओं को सराहा और उन्हें खूब स्नेह दिया।
इस अवसर पर सभी बच्चों को ड्राइंग कॉपी, स्केच पेन एवं बिस्किट उपहार स्वरूप भेंट किए गए। उपहार पाकर बच्चों के चेहरे खिल उठे। इलीशिबा जी ने बच्चों को आशीर्वाद देते हुए कहा कि वे जीवन में हमेशा खुश रहें, आगे बढ़ें और अपनी क्षमताओं पर विश्वास रखें।
उनके बेटे आलोक नाथ एवं बेटियों अर्चना नेताम और अंजना लाल ने कहा कि सार्थक के बच्चों के बीच आकर उन्हें बहुत आत्मीयता और आनंद की अनुभूति हुई। संस्था द्वारा बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए किए जा रहे प्रयास सराहनीय हैं। उन्होंने बच्चों की निरंतर प्रगति और उज्ज्वल भविष्य की कामना की। दामाद आर.एन. लाल एवं नाती आयुष ने भी बच्चों के उत्साह और प्रतिभाओं की प्रशंसा करते हुए कहा कि उनके साथ बिताए ये पल हमेशा याद रहेंगे। बहू उदिता ने भी बच्चों को भरपूर स्नेह और आशीर्वाद दिया।
सार्थक परिवार ने माना आभार
इस अवसर पर सार्थक की अध्यक्ष डॉ. सरिता दोशी ने कहा कि इलीशिबा जी का 90 वर्ष की उम्र में भी इतना जीवंत, उत्साही और संगीत से जुड़ा व्यक्तित्व हम सभी के लिए प्रेरणा है। विशेष बच्चों के बीच आकर उनके साथ गीत गाना, उन्हें प्रोत्साहित करना और उनकी खुशियों में सहभागी बनना उनके संवेदनशील हृदय और जीवन के सकारात्मक दृष्टिकोण को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि अपनी खुशियां विशेष बच्चों के साथ बांटना केवल उपहार देने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें अपनापन, सम्मान और जीवन में आगे बढ़ने का विश्वास देना भी है। इलीशिबा जी और उनके पूरे परिवार ने बच्चों को जो स्नेह और समय दिया, वह उनके लिए अनमोल है।
संस्था की सचिव स्नेहा राठौड़ ने परिवार का आत्मीय स्वागत करते हुए कहा कि ऐसे स्नेहपूर्ण मिलन विशेष बच्चों के जीवन में खुशी और प्रोत्साहन के साथ अपनत्व का भाव भी भरते हैं। प्रशिक्षकों ने भी परिवार के प्रति आभार व्यक्त किया।
इस अवसर पर सार्थक की अध्यक्ष डॉ. सरिता दोशी, सचिव स्नेहा राठौड़ तथा प्रशिक्षक मैथिली गोड़े, देविका दीवान, कौशिल्या यादव एवं काजल रजक उपस्थित थीं।
इलीशिबा जी का यह आत्मीय मिलन इस सुंदर विचार को साकार कर गया कि जीवन की सार्थकता केवल अपनी उपलब्धियों में नहीं, बल्कि अपने अनुभव, प्रतिभा, समय और स्नेह को दूसरों के साथ बांटने में भी है। 90 वर्ष की जीवनयात्रा के इस पड़ाव पर विशेष बच्चों के साथ गूंजा ‘हम होंगे कामयाब’ का स्वर उनके प्रेरक जीवन मूल्यों और आने वाली पीढ़ी के प्रति उनके विश्वास का संदेश बन गया।







