धमतरी का पैक्स आधारित ड्रोन कृषि सेवा मॉडल बना राष्ट्रीय पहचान का प्रतीक

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सीएससी के 17वें स्थापना दिवस समारोह में मिला सम्मान, तकनीक आधारित कृषि सेवाओं के लिए सराहा गया मॉडल

धमतरी । छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में विकसित प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति (PACS) आधारित ड्रोन कृषि सेवा मॉडल को राष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण पहचान मिली है। कोलकाता में आयोजित कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) ई-गवर्नेंस सर्विसेज इंडिया लिमिटेड के 17वें स्थापना दिवस समारोह में धमतरी के इस नवाचार को ग्रामीण क्षेत्रों में तकनीक आधारित कृषि सेवाओं के प्रभावी विस्तार तथा किसानों तक आधुनिक सुविधाएं पहुंचाने वाले अनुकरणीय मॉडल के रूप में सराहा गया।

कार्यक्रम के अंतर्गत “बेहतर कृषि सेवाओं की उपलब्धता के लिए पैक्स (PACS) का सशक्तिकरण” विषय पर आयोजित पैनल चर्चा (कृषि) में धमतरी जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री जयंत नाहटा (आईएएस) ने जिले के इस नवाचार और भविष्य की कार्ययोजना को विस्तार से प्रस्तुत किया। इस चर्चा में श्री पार्थ बसु (विशेष रजिस्ट्रार, सहकारिता विभाग, पश्चिम बंगाल सरकार), डॉ. शंकर गोयनका (प्रबंध निदेशक, वॉव गो ग्रीन–ड्रोन), श्री मनोज वार्ष्णेय (प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी, इफको एमसी एग्रोकेमिकल्स), श्री सुभाष कुमार झा (प्रमुख–बिक्री एवं विपणन, कोरोमंडल बायो), श्री साहिल गर्ग (प्रबंध निदेशक, रमन एग्रो), श्री विकास प्रमाणिक (मेहनती किसान एसकेयूएस लिमिटेड, पश्चिम बंगाल – पैक्स प्रतिनिधि) तथा श्री सुदीप खान (मुख्य कार्यपालन अधिकारी, कृषिमाया फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड – एफपीओ प्रतिनिधि) ने भी अपने विचार रखे।

श्री नाहटा ने बताया कि धमतरी में पैक्स समितियों को केवल सहकारी संस्थाओं तक सीमित न रखकर उन्हें ग्रामीण वन-स्टॉप एग्रीकल्चर सर्विस सेंटर के रूप में विकसित किया जा रहा है, जहां किसानों को आधुनिक तकनीक, डिजिटल सेवाएं तथा शासकीय योजनाओं का लाभ एक ही स्थान पर उपलब्ध कराया जाएगा।

उन्होंने बताया कि जिले की 10 पैक्स समितियों के माध्यम से वर्तमान में ड्रोन तकनीक से तरल उर्वरकों का छिड़काव किया जा रहा है। यह पहल किसानों के समय और श्रम की बचत करने के साथ-साथ उर्वरकों के वैज्ञानिक एवं समान वितरण को सुनिश्चित कर रही है। उन्होंने इसे छत्तीसगढ़ की अपनी तरह की पहली पहल बताते हुए कहा कि इससे खेती में आधुनिक तकनीक के उपयोग को बढ़ावा मिल रहा है तथा किसानों की लागत कम करने और उत्पादन क्षमता बढ़ाने की दिशा में सकारात्मक परिणाम मिल रहे हैं।

उन्होंने कहा कि आगामी चरण में पैक्स समितियों के माध्यम से कृषि यंत्रीकरण, ड्रोन सेवाएं, फसल सर्वेक्षण, किसान पंजीयन, डिजिटल सेवाएं, बैंकिंग एवं वित्तीय सुविधाएं, कृषि परामर्श तथा शासन की विभिन्न किसान हितैषी योजनाओं को एकीकृत किया जाएगा। इससे ग्रामीण क्षेत्रों के किसानों को विभिन्न सेवाओं के लिए अलग-अलग स्थानों पर जाने की आवश्यकता नहीं होगी और उन्हें गुणवत्तापूर्ण सेवाएं स्थानीय स्तर पर ही उपलब्ध हो सकेंगी।

पैनल चर्चा के दौरान विशेषज्ञों ने आधुनिक तकनीक आधारित कृषि प्रणाली, ड्रोन के बढ़ते उपयोग, डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से किसानों को सेवाएं उपलब्ध कराने तथा सहकारिता संस्थाओं की भूमिका पर विस्तार से विचार-विमर्श किया। वक्ताओं ने कहा कि ड्रोन तकनीक न केवल कृषि उत्पादकता बढ़ाने में सहायक है, बल्कि जल, उर्वरक और श्रम के कुशल उपयोग के माध्यम से टिकाऊ एवं लाभकारी कृषि को भी प्रोत्साहित करती है।

समारोह में उत्कृष्ट कार्य करने वाले सीएससी विलेज लेवल एंटरप्रेन्योर्स (VLEs) को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में भारत सरकार, पश्चिम बंगाल सरकार तथा सीएससी ई-गवर्नेंस सर्विसेज इंडिया लिमिटेड के वरिष्ठ अधिकारियों सहित विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

उल्लेखनीय है कि कलेक्टर श्री अबिनाश मिश्रा की उपस्थिति में पिछले माह कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीक के उपयोग को बढ़ावा देने तथा किसानों को वैज्ञानिक एवं उन्नत खेती से जोड़ने की दिशा में जिला धमतरी ने एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की थी। जिले की 10 प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों (PACS) में ड्रोन स्प्रेयर सुविधा प्रारंभ की गई, जिसके साथ धमतरी देश का पहला जिला बना, जहां सहकारी समितियों के माध्यम से किसानों को ड्रोन आधारित कृषि सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।

लोहरसी समिति में आयोजित कार्यक्रम में किसानों की उपस्थिति में सभी 10 समितियों के प्रशिक्षित ड्रोन पायलटों द्वारा ड्रोन स्प्रेयर का सफल प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शन के दौरान ड्रोन तकनीक के माध्यम से उर्वरक एवं कीटनाशकों के सटीक छिड़काव, समय की बचत, लागत में कमी तथा बेहतर कृषि प्रबंधन की उपयोगिता प्रदर्शित की गई।

जिले में जिन समितियों को ड्रोन स्प्रेयर सुविधा से जोड़ा गया है, उनमें बोड़रा, लोहरसी, दोनर, अछोटा, खरेंगा, भोथीडीह, कुंदेल, गड़ाडीह, जुगदेही तथा करेली शामिल हैं। इन समितियों के माध्यम से क्षेत्र के किसानों को आवश्यकता अनुसार ड्रोन सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।

राज्य और केंद्र सरकार किसानों के हितों के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही हैं। कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों को बढ़ावा देना सरकार की प्राथमिकता है। ड्रोन तकनीक किसानों की लागत कम करने, उत्पादन बढ़ाने तथा खेती को अधिक लाभकारी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। विकसित कृषि और समृद्ध किसान ही विकसित छत्तीसगढ़ की आधारशिला हैं।

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय द्वारा सहकारिता संस्थाओं को केवल ऋण वितरण तक सीमित न रखकर उन्हें बहुउद्देशीय सेवा केंद्र के रूप में विकसित करने पर विशेष बल दिया जा रहा है। समितियों के माध्यम से ड्रोन सेवाएं उपलब्ध कराना कृषि आधुनिकीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इससे किसानों को गांव स्तर पर ही आधुनिक सुविधाएं प्राप्त होंगी तथा सहकारिता आंदोलन को नई मजबूती मिलेगी। राज्य सरकार किसानों को तकनीक से जोड़कर उनकी आय बढ़ाने के लिए लगातार नवाचारों को प्रोत्साहित कर रही है।