
जंतर-मंतर से अस्पताल तक – सोनम वांगचुक के समर्थन में देशभर में विरोध, धमतरी के मितेश जैन 20 जुलाई को करेंगे एक दिवसीय अनशन
धमतरी| पर्यावरणविद् और शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक का दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहा अनिश्चितकालीन अनशन अब राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है। करीब 21 दिनों से जारी भूख हड़ताल के बीच दिल्ली पुलिस उन्हें जंतर-मंतर से हटाकर सफदरजंग अस्पताल ले गई। इसके बाद उनके समर्थकों ने इसे अवैध हिरासत बताते हुए विरोध प्रदर्शन तेज कर दिया है।
अस्पताल से जारी संदेश में सोनम वांगचुक ने 20 जुलाई को प्रस्तावित “चलो संसद” मार्च को सफल बनाने की अपील करते हुए इसे “दूसरी आजादी का आंदोलन” बताया है।
वांगचुक के समर्थकों का आरोप है कि उन्हें उनकी इच्छा के विरुद्ध अस्पताल में रखा गया है। उनकी पत्नी गीतांजलि जे. अंगमो ने दिल्ली उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर उन्हें निजी अस्पताल में स्थानांतरित करने की मांग की है। वहीं, जंतर-मंतर से हटाए जाने के बावजूद प्रदर्शनकारी 20 जुलाई को संसद मार्च निकालने के अपने निर्णय पर कायम हैं।
बताया जा रहा है कि वांगचुक का आंदोलन विभिन्न राष्ट्रीय मुद्दों और लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़े सवालों को लेकर चल रहा है। पुलिस द्वारा देर रात की गई कार्रवाई के बाद देश के कई हिस्सों में उनके समर्थन में प्रदर्शन शुरू हो गए हैं।

इसी क्रम में छत्तीसगढ़ के धमतरी निवासी सामाजिक कार्यकर्ता मितेश कुमार जैन ने भी सोनम वांगचुक के समर्थन में 20 जुलाई को एक दिवसीय अनशन पर बैठने की घोषणा की है। मितेश कुमार जैन ने बताया कि उन्होंने अपने प्रस्तावित अनशन की सूचना धमतरी पुलिस प्रशासन को लिखित रूप से दे दी है।
उन्होंने कहा कि यह अनशन लोकतांत्रिक अधिकारों और शांतिपूर्ण आंदोलन के समर्थन में किया जाएगा। साथ ही उन्होंने नागरिकों से भी संवैधानिक और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज बुलंद करने की अपील की है। मितेश जैन के इस निर्णय के बाद धमतरी में भी इस मुद्दे को लेकर चर्चा तेज हो गई है।


