दृढ़ संकल्प के धनी थे आचार्य श्री जयमलजी – साध्वी डॉ बिन्दुप्रभा

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परम पूज्य जयमलजी की 315वीं जन्मजयंती पर हुआ तीन दिवसीय धार्मिक आयोजन
निधिश बैद ने 29वें उपवास का ग्रहण किया प्रत्याख्यान,  संघ द्वारा किया गया सम्मान
धमतरी । धमतरी स्थित जैन स्थानक भवन सिहावा चौक में आचार्य जयमलजी की जयंती पर आयोजित त्रिदिवसीय कार्यक्रमों में अंतिम दिन जयमल जाप और उनके जीवन प्रसंगों को स्मरण श्रवण करने बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित हुए। धर्मसभा में विराजित साध्वी डॉ. बिन्दुप्रभा ने कहा कि पूज्य आचार्य श्री जयमलजी म.सा दृढ़ संकल्प के धनी थे मात्र एक प्रवचन श्रवण मात्र से दृढ़ संकल्प कर आजीवन ब्रह्मचर्य के प्रत्याख्यान कर संयम रुपी रत्न अंगीकार करने की दृढ़ प्रतिज्ञा ली। संयम रुपी रत्न अंगीकार कर अपनी आत्मा को तप में तपाने लग गये। अपनी साधना से अनेकों को जीवनदान दिया, उनके चमत्कारी नाम के उच्चारण मात्र से ही संकट और बाधाएं टल जाती है, ऐसे अनेकों उदाहरण प्रत्यक्ष मिलते हैं। ऐसे महापुरुषों के गुणों को शब्दों में वर्णित करना मुश्किल है। जन-जन में उनके प्रति श्रद्धा और विश्वास है। महान आत्माओं की कथनी और करनी समान होती है, उनका आचार और विचार दोनों ही उत्कृष्ट होते हैं। आचार्य श्री जयमलजी म.सा ने वि. सं 1804 में आजीवन आडा आसन नहीं करने की भीष्म प्रतिज्ञा अंगीकार की थी ।

साध्वी श्री ने कहा कि पूज्य आचार्यश्री जयमलजी महाराज का जन्म ऐसे समय में हुआ जब राजनीतिक, सांस्कृतिक और धार्मिक स्तर पर विलासिता, अत्याचार का वातावरण था। उनका जन्म जोधपुर रियासत के मेड़ता में पिता कामदार मोहनदास और माता महीमादेवी की कुक्षिसे हुआ। जन्म के समय ही पिताजी ने डाकूओं द्वारा अपहृत गायों की रक्षा की और विजयी होकर लौटे और पुत्र प्राप्ति का समाचार मिला, जिससे उनका नाम जयमल रखा गया। बचपन से ही तीव्र बुद्धि और तेजस्वीता के धनी थे। चातुर्मास व्यवस्था समिति के अध्यक्ष अविनाश चौरडिय़ा ने बताया कि आचार्य जय जन्मोत्सव पर तप की भेंट करने खरियार रोड़ से श्रद्धा डूंगरवाल ने 16 की तपस्या के प्रत्याख्यान ग्रहण किए। आज निधिश बैद ने 29वें उपवास का प्रत्याख्यान ग्रहण किया। संघ द्वारा सम्मान किया गया। अनेक श्रद्धालुगणों ने तेल की तपस्या की। जिसमें तेले  की लड़ी में प्रमुख रुप से शोभा बैद, वंदना चौरडिय़ा, रिंकु कवाड़, सीमा गोलछा, सुशीला बरडिय़ा, संगीता लुनिया, किरण नाहर, राखी संकलेचा, कविता लोढ़ा, कमला मिन्नी, सुशील चौरडिय़ा, अनिता चौरडिय़ा, तुषार चौरडिय़ा, महेश कोटडिय़ा, कमलेश कोटडिय़ा, प्रेमचंद मिन्नी, विमला ओस्तवाल, आशीष मिन्नी, दिनेश लोढ़ा, लुनकरण गोलछा, ऐजेस बुरड तपस्यार्थियों का बहुमान मदनलाल अविनाश चौरडिय़ा परिवार द्वारा किया गया है। प्रवचन पश्चात समता महिला मंडल द्वारा स्वागत गीत प्रस्तुत किया गया। उसके पश्चात जय एकता महिला मंडल के गठन के बाद गुरु भक्ति मंडल द्वारा की गई। आगुंतकों के आतिथ्य सत्कार स्वरुपचंद मुकेश दिनेश बैद परिवार रहे। कार्यक्रम में 11 लक्की ड्रा निकाले गये। दोपहर चमत्कारी जय जाप का अनुष्ठान रखा गया उसमें 5 लक्की ड्रा निकाले गये।  इस अवसर पर रायपुर, नगरी, दुर्ग, राजिम, फिंगेश्वर, गरियाबंद, खरियार रोड़, कलंकपुर, छुरा आदि अनेक क्षेत्रों से श्रद्धालुओं की उपस्थिति थी। चेन्नई, जोधपुर, नागोर संघ द्वारा परम पूज्य जयमल जी म.सा. पर आधारित नाटिका की प्रस्तुति देने वालो  बच्चों का व जयमल जी म.सा. की पेटिंग बनाए जाने पर रक्षिता चौरडिय़ा का सम्मान किया गया। प्रभावना भंडारी परिवार, चौरडिय़ा परिवार, कोठारी परिवार द्वारा किया गया। कार्यक्रम का संचालन वंदना चौरडिय़ा ने किया।