ग्राम तुमड़ीबहार में महिलाओं को दिया गया शहद प्रसंस्करण का व्यावहारिक प्रशिक्षण

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तकनीकी कौशल से स्वरोजगार, आय में वृद्धि और महिला आत्मनिर्भरता को मिलेगा बढ़ावा

धमतरी । जिले के वनांचल क्षेत्र में महिलाओं को आजीविका के नए अवसरों से जोड़ने तथा स्थानीय संसाधनों के बेहतर उपयोग को प्रोत्साहित करने की दिशा में ग्राम तुमड़ीबहार, विकासखंड नगरी में महिलाओं को शहद प्रसंस्करण (हनी प्रोसेसिंग) का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण का उद्देश्य महिलाओं को शहद के प्रसंस्करण, गुणवत्ता बनाए रखने, सुरक्षित पैकेजिंग तथा विपणन के लिए आवश्यक तकनीकी जानकारी देकर स्वरोजगार के अवसरों से जोड़ना है।
कृषि विज्ञान केंद्र के डॉ. अमित सिन्हा ने बताया कि प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागी महिलाओं को शहद प्रसंस्करण में उपयोग होने वाली मशीनों के संचालन, रखरखाव और उनके सुरक्षित उपयोग की जानकारी दी गई। इसमें शहद गर्म करने, छानने, स्थिरीकरण तथा पैकेजिंग से संबंधित इकाइयों के संचालन का व्यावहारिक अभ्यास कराया गया। महिलाओं ने फिल्टर को जोड़ने, उसके सही उपयोग तथा सफाई की प्रक्रिया भी सीखी। इससे उन्हें शहद को स्वच्छ एवं व्यवस्थित तरीके से प्रसंस्कृत करने की तकनीकी समझ विकसित करने में मदद मिलेगी। इससे पूर्व, 17 सितंबर 2026 को भी इसी प्रकार का एक दिवसीय प्रशिक्षण आयोजित किया गया था।
उन्होंने बताया कि शहद प्रसंस्करण का कौशल ग्रामीण महिलाओं के लिए आजीविका का एक उपयोगी माध्यम बन सकता है। स्थानीय स्तर पर उपलब्ध शहद का उचित प्रसंस्करण, आकर्षक पैकेजिंग और बाजार की मांग के अनुरूप विक्रय करने से उत्पाद का बेहतर मूल्य प्राप्त करने की संभावनाएं बढ़ती हैं। महिलाएं स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से सामूहिक रूप से यह गतिविधि अपनाकर स्थानीय बाजारों, दुकानों, मेलों तथा अन्य संभावित विक्रय माध्यमों तक अपनी पहुंच बना सकती हैं। इससे स्वरोजगार के अवसर सृजित होने के साथ परिवार की आय बढ़ाने और महिलाओं की आर्थिक भागीदारी मजबूत करने में मदद मिल सकती है।
कलेक्टर श्री अबिनाश मिश्रा ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय संसाधनों पर आधारित आजीविका गतिविधियों को प्रोत्साहित करना तथा महिलाओं को व्यावहारिक कौशल से सशक्त बनाना महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रशिक्षण महिलाओं को स्वरोजगार की संभावनाओं से परिचित कराने, उत्पादों का मूल्य संवर्धन करने और आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ने में सहायक होते हैं। उन्होंने प्रशिक्षण में प्राप्त तकनीकी जानकारी का उपयोग आजीविका गतिविधियों में करने तथा उपलब्ध अवसरों का लाभ उठाने के लिए प्रोत्साहित किया। इस प्रकार के कौशल प्रशिक्षण ग्रामीण महिलाओं की क्षमताओं को निखारने, स्थानीय उत्पादों को पहचान दिलाने और गांवों में रोजगार एवं आय के नए अवसर विकसित करने की दिशा में उपयोगी पहल हैं।