वन अधिकार पट्टा जीविकोपार्जन के लिए, पेड़ नहीं काटे जाएं – कलेक्टर

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कलेक्टर ने सामुदायिक वन अधिकार पत्र की कार्यशाला में वन समितियों के सदस्यों को संबोधित करते हुए कहा

धमतरी | वन अधिकार अधिनियम-2006, नियम-2007, संशोधित नियम 2012 के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए आज जनपद पंचायत धमतरी के सभाकक्ष में एकदिवसीय कार्यशाला सह प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें कलेक्टर  जयप्रकाश मौर्य ने कहा कि व्यक्तिगत वन अधिकार मान्यता पत्र देने के बाद शासन के निर्देशानुसार अब सामुदायिक वन पट्टे वितरित किए जा रहे हैं, जिससे निश्चित तौर पर वनोपज एवं वनोत्पाद पर निर्भर रहने वाले लोगों को आजीविका का पुख्ता साधन मिलेगा। उन्होंने कहा कि शासन द्वारा वन अधिकार पत्र जीविकोपार्जन के लिए दिया जाता है। इसका दुरूपयोग कदापि नहीं होना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट तौर पर कहा कि हितग्राही प्रदायित भूखण्ड पर खेत एवं अन्य रोजगारमूलक संरचना का निर्माण अवश्य करें, किंतु व्यक्तिगत लाभ के लिए पेड़ों को काटा अथवा बेचा नहीं जाना चाहिए। जहां तक संभव हो, ऐसे समाधानकारक प्रयास करें, जिससे पेड़ न काटे जाएं। कलेक्टर ने कहा कि पेड़-पौधों से न सिर्फ पर्यावरण सुरक्षित है, बल्कि मानव जीवन के लिए आॅक्सीजन, प्रदूषणरहित, भूजल स्तर, वायु और वर्षा आदि में उल्लेखनीय भूमिका पेड़ों की रहती है।


उल्लेखनीय है कि वन अधिकार अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन के उद्देश्य से चार दिवसीय कार्यशाला का आयोजन विकासखण्ड नगरी, मगरलोड तथा धमतरी विकासखंड में प्रशिक्षण आयोजित किया गया, जिसका समापन आज धमतरी विकासखंड में हुआ। प्रशिक्षुओं उक्त प्रशिक्षण में मुख्य रूप से सामुदायिक वन अधिकार पत्रों के लिए आवेदन करने की प्रक्रिया, आवेदन हेतु आवश्यक प्रपत्रों की व्याख्या, सामुदायिक अधिकार के अंतर्गत विभिन्न प्रयोजनों के लिए दावा तथा वन अधिकार अधिनियम अंतर्गत गठित विभिन्न समितियों के कर्तव्यों व दायित्वों के संबंध में प्रशिक्षण प्रदान किया गया। प्रशिक्षण सह कार्यशाला के समापन अवसर पर एसडीएम धमतरी  मनीष मिश्रा, नगरी  सुनील शर्मा, सहायक आयुक्त आदिवासी विकास डाॅ. रेशमा खान, एसडीओ वन  हरीश पाण्डेय सहित वन, राजस्व विभाग तथा पंचायत विभाग के अधिकारी-कर्मचारी एवं प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे वन समिति के सदस्यगण उपस्थित थे।