लॉक डाउन ह मार डारिस, काम काज ह बंद हे, घर म नून तेल सिरा गे : गरीब परिवारों का छलका दर्द

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रविवार को  सुबह   News For Everyone 493773  की  टीम  शहर  के  रुद्री रोड  स्थित  अटल आवास  पहुंची  तो  वहां के रहवासियों  ने  लॉक डाउन  के  चलते  अपना  दुखड़ा सुनाया  आपको बता  दे  कि  अटल आवास  के रहवासी  रोज कमाने  खाने वाले हैं| उन्होंने जैसा  बताया वह उनकी जबानी –

कलेक्टर हा 9 दिन बर लॉकडाउन के घोषणा करे हाबे |अभी पांचे दिन हो हे लॉक डाउन ला। घर के सब्बो जिनिस ह सिरावत हा बे। दु दिन अउ चलही । ओकर बाद काला खाबो,  कइसे जीबो। एला सोच-सोच के आँखी डाहर ले आंसू आ जथे । कोन्हो काहत हे मोर घर के तेल ह सिरागे। कोन्हो काहत हे मोर घर साग नईहे। नून मिरचा के चटनी खाके दिन ला गुजारत हन |

धमतरी | यह दुख भरी दास्तान शहर के कई गरीब परिवारों की है जो मजदूरी कर अपने परिवार की गाड़ी खींच रहे हैं | लॉकडाउन के चलते काम काज बंद हो गया है| अब वे दाने-दाने को मोहताज हो रहे हैं| उन्होंने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से इस दुख की घड़ी में सहायता दिलाने की गुहार लगाई है|
रुद्री रोड स्थित कैलाशपति नगर के पीछे अटल आवास है जहां कई गरीब परिवार निवासरत है| जो रोजी मजदूरी कर किसी तरह अपने परिवार का पेट भरता है | कोरोना संक्रमण के प्रसार को रोकने और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए जिला प्रशासन ने 22 से 30 सितंबर तक जिले के सभी नगरीय निकायों में लॉकडाउन की घोषणा की है

जिसका यहां पालन किया जा रहा है। लॉकडाउन का सबसे बड़ा गहरा प्रभाव रोज कमाने खाने वालों पर पड़ा है |पेशे से रिक्शा चालक संतोष ने बताया कि वह रिक्शा चलाकर अपना और अपने परिवार का भरण पोषण करता है | लॉकडाउन के कारण काम धंधा बंद हो गया है | ऐसे में परिवार चलाना मुश्किल हो रहा है | उन्होंने आगे बताया कि पहले शहर में रिक्शे की डिमांड थी। अब ई -रिक्शा आने से उनकी पूछ परख कम हो गई है जिससे आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है| प्रशासन  ने 9 दिन का लॉकडाउन किया है जिससे पूरा शहर बंद है | वह अत्यंत गरीब है | ऐसे में वह पूरे लॉकडाउन अवधि के लिए राशन एकमुश्त कहां से जमा कर पाएगा |अभी 5 दिन ही लॉकडाउन हुआ है | उनके घर का सामान खत्म होने वाला है| आज भर का ही राशन बचा है | उसके बाद अपने परिवार को  क्या  खिलाएंगे | विकट समस्या खड़ी हो गई है | आज तो मेरे घर का मिर्च भी खत्म हो गया | पड़ोसी से मांगकर काम चलाया गया|

इसी तरह की व्यथा होटल में काम करने वाले रामअवतार ने बताई |उसने बताया कि वह शहर के एक होटल में काम कर अपने परिवार का पेट पाल रहा था | होटल बंद होने से उनका काम बंद हो गया है |लॉकडाउन से उन पर मुसीबत आ गई है |उनके घर का राशन दो दिन में खत्म हो जाएगा | उनके पास इतने पैसे नहीं थे कि वह 9 दिनों के लिए राशन का जुगाड़ कर पाता |


रमेश विश्वकर्मा ने बताया कि लॉकडाउन की वजह से उन्हें आर्थिक दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है | उसके दो बेटे हैं | दोनों बढ़ाई का काम करते हैं | बड़े बेटे का काम दो माह से बंद है | छोटा बेटा गोलू के कामकाज से ही परिवार का भरण-पोषण हो रहा था|
लॉकडाउन के कारण उसका भी काम बंद हो गया है | ऐसे में परिवार चलाने में परेशानी हो रही है| राशन खत्म होने वाला है | एक दिन में खत्म हो जाएगा | खाने-पीने की समस्या आ जाएगी | घर में सब्जी भी नहीं है |

इसी तरह का हाल रिक्शा चालक नरेंद्र धृतलहरे का है |उसने बताया कि जबसे शहर में ई – रिक्शा दौड़ने लगी है तबसे उसकी कमाई कम हो गई है |अब शहर में ग्राहक भी नहीं मिलते |कभी कभार ही सवारी मिल पाती है | ऐसे में उन्हें जीविकोपार्जन में बड़ी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है |उसके दो छोटे-छोटे बच्चे हैं | शहर में नौ दिन का लॉकडाउन है जिसके चलते उनका काम-काज बंद हो गया है| लॉकडाउन की वजह से सभी प्रतिष्ठान बंद है | आज मेरे घर की राशन सामग्री खत्म हो गई | पूरे लॉकडाउन तक सामान की पूर्ति करना संभव नहीं है | सब्जियां भी नहीं बची है | लॉक डाउन खुलने के बाद  ही  रिक्शाचला कर भोजन की व्यवस्था कर पायेगा। उन्होंने आगे कहा कि गरीब परिवारो की मदद के लिए प्रशासन और समाज सेवी संस्थाओं को आगे आना चाहिए|

News For Everyone 493773 शहर के सभी नागरिक से अपील करती है कि  घर पर रहे, सुरक्षित रहें, अनावश्यक  बाहर न निकलें,  शासन- प्रशासन के नियमों का पालन करें | अपने आसपास के जरुरतमंदों की मदद करें |