राज्य सरकार धान खरीदी की बकाया राशि पिछला बोनस एवं लघु वनोपज समितियों को लाभांश की राशि अविलंब वितरित करे – शशि पवार

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राजेश रायचुरा/आशीष मिन्नी

धमतरी कोरोना की वजह से चल रहे लॉकडाउन से राज्य के निवासियों की दशा दयनीय हो चुकी है। छग की दो तिहाई आबादी कृषि और वन आधारित कार्यों से अपना जीविकोपार्जन करती है। राज्य सरकार किसानों को लुभावने वादे कर सत्तासीन हुई थी परन्तु किसानों मजदूरों और प्रदेश के आदिवासी वर्ग के साथ किये गये उनके सारे वादे झूठे साबित हुये हैं।


जिला भाजपा अध्यक्ष ठाकुर शशि पवार ने कहा कि धान खरीदी में सरकार ने जितने प्रपंच किये उससे किसान पहले ही दुखी और त्रस्त था उस पर इस महामारी के संकट ने अन्नदाताओं का जीवन और कठिन कर दिया है। ऐसे समय मे सरकार को बिना विलंब किये धान खरीदी की अंतर की बकाया राशि उनके खाते में जमा कराना चाहिये इसके लिये बजट में प्रावधान भी किया जा चुका है उसके बावजूद सरकार इसका भुगतान करने में देर कर रही है। इसके साथ ही अपने घोषणा पत्र के वादे के अनुसार पिछला बकाया बोनस देने पर भी गंभीरता दिखानी चाहिये।
इसके अतिरिक्त असमय बरसात और ओलावृष्टि के चलते रबी फसल में चना और लाखड़ी इत्यादि उन्हारी फसलों को बहुत अधिक नुकसान हुआ है अतः 6(4) के प्रावधानों के तहत इन किसानों को मुआवजा या प्रोत्साहन राशि देने की व्यवस्था भी सरकार को करनी चाहिये।
श्री पवार ने आज जारी विज्ञप्ति में आगे कहा कि छग वनवासियों एवं आदिवासियों का प्रदेश है और लाखों लोग यहाँ पर तेंदूपत्ता संग्रहण का कार्य कर अपना जीवन चलाते हैं। प्रदेश में लघु वनोपज समितियों के द्वारा तेंदूपत्ता संग्रहण किया जाता है जिसकी नीलामी सरकार द्वारा की जाती है। नीलामी से जो आमदनी होती उसे लाभांश के रूप में वन समितियों को वितरित किया जाता है। 98% समितियों के सदस्य अनुसूचित जनजाति वर्ग से हैं। पिछले 2 वर्ष से इनको सरकार द्वारा लाभांश वितरण नही किया गया है। जिससे अनुसूचित जनजाति वर्ग के लोगों में सरकार के प्रति रोष व्याप्त है। सरकार के पास 600 करोड़ रुपये लाभांश की राशि पड़ी है जिसका तत्काल वितरण समितियों को किया जाना चाहिये।
केंद्र की सरकार ने जिस प्रकार संकट की इस घड़ी में गरीब कल्याण योजना के अंतर्गत गरीबो के कल्याण का पूरा ख्याल रखते हुये 1 लाख 70 हजार करोड़ का राहत पैकेज बिना देर किये जारी किया उसी प्रकार राज्य सरकार को भी गरीबों की सुध लेनी चाहिये। अंतिम छोर पर निवासरत अति गरीब और सर्वहारा वर्ग की चिंता करना किसी भी सरकार का प्रथम कर्तव्य होता है और छग की कांग्रेस सरकार इस कसौटी पर पूरी तरह असफल साबित हुई है।