मनरेगा से किसान सुकमन मरकाम का सपना हुआ पूरा, खुला आर्थिक समृद्धि का द्वार

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सुकमन के खेत में मछलीपालन के लिए मनरेगा से बना तालाब, पानी की कमी से अब नहीं सूखेंगे खेत
अल्पवर्षा की स्थिति में तालाब के पानी से खेतों की कर सकेंगे सिंचाई

धमतरी|  मछलीपालक दोस्तों के साथ उठते-बैठते कृषक श्री सुकमन मरकाम के मन में भी यह बात उपजी कि अगर उनके पास भी एक निजी तालाब हो तो मछलीपालन के जरिए अपनी आमदनी में चार चांद लगा सकते हैं। गांव के ज्यादातर किसानों की भांति श्री सुकमन भी मानसून आधारित खेती करते हैं। सिंचाई का समुचित साधन नहीं होने से बरसात के बाद कोई और फसल लेने की गुंजाइश ही नहीं थी। इसी बीच अपने साथियों से वे मछलीपालन से कम समय में होने वाली कमाई के बारे में सुन उनके मन में भी मछलीपालन की इच्छा बलवती हुई।


जिले के नगरी विकासखंड के सरईटोला (मा.) ग्राम पंचायत के आश्रित गांव गट्टासिल्ली (रै.) के किसान श्री सुकमन मरकाम के इस सपने को मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम) ने पूरा कर दिया है। उन्होंने मछलीपालन के लिए अपनी निजी जमीन पर तालाब की मांग ग्राम पंचायत से साझा की। ग्राम पंचायत की पहल से मनरेगा से उनके लिए तीन लाख रूपए की लागत से निजी तालाब के निर्माण का कार्य स्वीकृत हो गया। इसके बाद पिछले साल नवम्बर में तालाब की खुदाई शुरू हुई और इस वर्ष मई में इसका काम पूरा हो गया। तालाब खुदाई के दौरान गांव के 76 श्रमिकों को कुल 1424 मानव दिवस का रोजगार प्राप्त हुआ, जिसके लिए उन्हें दो लाख 71 हजार रूपए का मजदूरी भुगतान किया गया। श्री सुकमन मरकाम के परिवार को भी इस काम में 54 मानव दिवस का सीधा रोजगार मिला, जिसके एवज में उन्हें दस हजार 260 रूपए की मजदूरी मिली।


मनरेगा से श्री सुकमन मरकाम के खेत में 30 मीटर लंबाई और इतनी ही चौड़ाई का तालाब खोदा गया है। वे बताते हैं कि आसपास के जलस्रोतों और बारिश के पानी से तालाब भर गया है। उन्होंने इसमें सात किलो मछली बीज (स्पॉन) डाला है। कुछ महीने बाद बाजार में बेचने लायक मछलियां तैयार हो जाएंगी और इसके साथ ही श्री सुकमन मरकाम का सपना भी साकार हो जाएगा। तालाब के पानी से अल्पवर्षा की स्थिति में वे अपने खेतों की सिंचाई भी कर सकेंगे। मनरेगा से निर्मित यह तालाब श्री सुकमन मरकाम को आजीविका के लिए मछलीपालन का मजबूत विकल्प देने के साथ ही सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराकर उनके फसलों की पैदावार भी बढ़ाएगा। इससे न सिर्फ उनकी कमाई बढ़ेगी, बल्कि परिवार की आर्थिक समृद्धि का रास्ता भी खुलेगा।