प्रकृति के संरक्षण और संवर्धन के बिना जीवन संभव नहीं

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30 अगस्त को प्रकृति वंदन, पूजन का संकल्प लें :मोहनलाल 

कोर्रा | प्रकृति के साथ जीना भारतीय जीवन पद्धति है| भारतीय संस्कृति, परम्परा में प्रकृति के प्रति अगाध श्रद्धा एवं आस्था का भाव रहा है| प्रकृति का संरक्षण यह केवल कर्त्तव्य नही अपितु यह हमारी जिम्मेदारी है | इस दृष्टि से हम व्यवहार करते हैं|सम्मान प्रदर्शित करते हैं|कोर्रा के समाजसेवी मोहनलाल  साहू ने कहा कि हमारी सनातन हिन्दू संस्कृति प्रकृति पुजक है । इस सृष्टि के समस्त जीवों का जीवन प्रकृति के संरक्षण और संवर्धन के बिना असंभव है । प्राकृतिक असुंतलन की वजह से ही हमें संकटों का सामना करना पड़ रहा है ।

इस प्राचीन एवं गौरवशाली परंपरा के अनुपालन में हिंदू आध्यात्मिक एवं सेवा फाउंडेशन द्वारा प्रकृति वंदन के कार्यक्रम का विशेष आयोजन किया जा रहा है। जिसके अंतर्गत 30 अगस्त को  सुबह 10 बजे प्रत्येक परिवार प्रकृति के सांकेतिक वंदन के रूप में अपने निवास में ही किसी वृक्ष अथवा गमले में लगे पौधे का पूजन  करे | उन्होंने बताया कि पूजन में तीन बार ॐकार की ध्वनि के साथ वृक्ष को तिलक-अक्षत लगाकर रक्षा सूत्र के रूप में मोली धागा बाँध कर, जल समर्पित कर पेड़-पौधे के संरक्षण का संकल्प लेना है। आरती तथा वृक्ष परिक्रमा के साथ वंदन सम्पन्न होगा।