केंद्र सरकार के कृषि कानून के खिलाफ जिला महिला कांग्रेस ने किया प्रदर्शन

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जिला महिला कांग्रेस धमतरी शहर की महिलाओं के द्वारा 31 अक्टूबर को धरना प्रदर्शन नारेबाजी किया गया

धमतरी | केंद्र सरकार ने लॉकडाउन के दौरान तीन कृषि कानूनों के अध्यादेश को एग्रीकल्चर एक्ट के रूप में पारित किया जिसमें किसान संगठन और विपक्ष का विरोध रहा बिना पर्याप्त चर्चा के एनडीए सरकार ने तानाशाही और अलोकतांत्रिक तरीके से इस अध्यादेश को पारित कर दिया ऐसे कानून की ना जरूरत थी ना मांग थी पूरे देश में किसान संगठन एवं विपक्ष प्रदर्शन कर रहे हैं बिल को वापस लेने की मांग कर रहे हैं | इस अध्यादेश का पहला कानून है उपज व्यापार और वाणिज्य संवर्धन सुविधा 2020 जो एपीएमसी का बायपास कानून है |

अथवा सरल हिंदी में मंडी तोड़ो एमएसपी छोड़ो कानून है इस कानून के तहत सरकारी समर्थन मूल्य समाप्त कर दिया गया हमारे देश का 60 से 70% किसान गरीब या मध्यमवर्गीय है जो अपने फसल के उपज को बिचौलियों के मार्फत व्यापारियों पूंजी पतियों के गोदामों की ओर ले जाने के लिए भटकता रहेगा क्या उसे उचित मूल्य मिलेगा क्या समय पर उपज बिकेगा जो किसान 1 एकड़ आधा एकड़ का मालिक है क्या वह व्यापारियों के इन गोदामों तक पहुंच सकेगा एसेंशियल कमोडिटी एक्ट 1955 में केंद्र सरकार द्वारा संशोधन किया गया | जिससे अनाज ,तिलहन ,आलू ,प्याज, के भंडारण पर अब कोई लिमिटेशन नहीं रहेगा बस यहीं से इस नए कानून का खेल शुरू होगा किसान को अपनी फसल के उपज को बेचना उसकी मजबूरी होगी क्योंकि भंडारण की क्षमता नहीं है

और जमाखोर व्यापारी भंडारकर डिमांड एंड सप्लाई का गोरखधंधा ,मुनाफाखोरी बढ़ेगा जिसके नतीजे आना शुरू हो गए हैं प्याज को आज हम 80 से ₹100किलो में खरीद रहे हैं वही किसान को 5 से ₹6 किलो मिल रहा है तो यह बीच का पैसा कहां जा रहा है पूंजीपतियों व्यापारियों के जेब में जा रहा है और किसान खून के आंसू रो रहा है क्योंकि कृषि के तीन बिल सरकार द्वारा अदानी को लाभ पहुंचाने की एक सोची समझी साजिश है गृहनी का बटवा खाली है किचन खाली है आगे दिवाली है गरीब की थाली में प्याज का ना होना भुखमरी के समान है पर हमारे प्रधानमंत्री की वी पर त्योहारों की शुभकामनाएं देते हैं जबकि वे महंगाई कम करने की बात करते तो ज्यादा कारगर होता।

केंद्र सरकार के प्रतिकूल नीतियां और नियत में खोट है बारिश एवं कुछ प्राकृतिक आपदाओं के कारण प्याज के उत्पादन में कमी आई समय रहते प्याज के निर्यात को क्यों नहीं रोका गया ?समय रहते विदेशों से प्याज का आयात क्यों नहीं करा गया ?जमाखोरों मुनाफा खोरो पर कार्यवाही क्यों नहीं की गई ?क्योंकि केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियां संदेहास्पद है वित्त मंत्री ने तो यह कहकर किनारा कर लिया की हमारे परिवार में प्याज नहीं चलता ऐसे लापरवाही भरे जवाब से की उम्मीद नहीं थी ।प्याज सरकारों के लिए हमेशा संवेदनशील मुद्दा रहा है 1998 में भाजपा को प्याज ने ऐसा रुलाया कि आज तक दिल्ली पर अपना कब्जा नहीं जमा सके ।

भाजपा के अश्विनी चौबे का कहना है की प्याज केंद्र का मुद्दा है ही नहीं ,भाजपा के प्रवक्ता नरेंद्र तनेजा का मानना है कि आलू प्याज के दर प्रदेश की नीतियों पर निर्भर करता है ,तो फिर इन्हें एसेंशियल कमोडिटी अधिनियम से क्यों हटाया गया? केंद्र सरकार प्याज का आयात क्यों कर रही है ?क्योंकि इसमें भी कमीशन का षड्यंत्र है। किसान पहले ही प्राकृतिक आपदाओं से जूझ रहा है एक राष्ट्र एक बाजार है तो एक कीमत क्यों नहीं है? कृषि कानून बनाकर सिर्फ पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाना ही इस बिल का मकसद है यह कानून किसानों को ठगने वाला कानून है, किसानों के मन में संशय पैदा करने वाला कानून है, कोरोना  संकटकाल में जब देश के लोग विभिन्न परिस्थितियों से गुजर रहे हैं |

शारीरिक, मानसिक, आर्थिक ,पलायन, बेरोजगारी शिक्षा का अभाव ,सामाजिक असुरक्षा, महंगाई ,कालाबाजारी ,महिलाओं के साथ बढ़ते अनाचार जैसे समस्याओं से जूझ रहा है तो ऐसी स्थिति में केंद्र सरकार ने कृषि के क्षेत्र में 3 नए अध्यादेश जारी कर दिए जिससे पूरा बाजार बड़े बड़े व्यापारियों जमाखोरों के कब्जे में आ जाएगा मनमाने दाम पर बाजार चलेगा कृषि कानून ना सिर्फ किसानों पर भारी पड़ेगा बल्कि आम आदमी, आम उपभोक्ताओं के हित के खिलाफ है इन्हीं मुद्दों को लेकर जिला महिला कांग्रेस धमतरी शहर की महिलाओं के द्वारा 31 अक्टूबर को प्रदेश अध्यक्ष श्रीमती फूलों देवी नेताम के आदेशानुसार मां विंध्यवासिनी मंदिर धमतरी के चौराहे पर धरना प्रदर्शन नारेबाजी किया गया।