किसानों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में क्रांतिकारी कदम साबित होगा कृषि बिल : शशि पवार

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विपक्ष कर रहा किसानों को गुमराह

धमतरी | भारतीय जनता पार्टी ने कृषि बिल 2020 के कानून बनने पर देश के किसानों को बधाई दी है। भाजपा जिलाध्यक्ष ठा. शशि पवार ने बताया कि वे स्वयं एक कृषक हैं और पीढ़ियों से उनके परिवार की आजीविका का मुख्य साधन कृषि ही है। आजादी के बाद से लगातार कांग्रेस की सरकार ने कृषकों का शोषण ही किया है। देश के अन्नदाताओं की स्थिति आज भी दयनीय है। उन्हें जानबूझकर खेतों, मंडियों और सोसाइटियों तक ही सीमित रखा गया है। यही कारण आज की युवा पीढ़ी भी परंपरागत कृषि कार्य से विमुख होती जा रही है। देश का व्यवसायी, उद्योगपति डिजिटल माध्यमों का उपयोग कर अपने व्यवसाय का दायरा न केवल देश के अंदर बल्कि विदेशों तक भी फैलाने में सफल हो रहा है वहीं किसान अपने गांव, अपने कस्बे और अपने जिले से बाहर नही निकल पाया है। अर्थशास्त्री भी मानते हैं कि भारत की अर्थव्यवस्था कृषि प्रधान है| ऐसे में कृषकों को ज्यादा से ज्यादा अवसर प्राप्त हों इसमे किसी राजनीतिक दल को आपत्ति क्यों हो रही है। नये कानून में यह स्पष्ट प्रावधान है कि इसमे किसानों को मिलने वाला एमएसपी का लाभ किसी तरह से प्रभावित नही होगा और न ही मंडियों को बंद करने जैसी कोई बात इस कानून में है। इतना ही नही खाद्य सुरक्षा कानून के तहत सरकार 80 करोड़ लोगों को खाद्यान्न वितरित करती है जिसके लिये उसे किसानों से धान खरीदना ही पड़ता है |

ऐसी स्थिति में सरकारों की धान खरीदी भी यथावत जारी रहेगी | इसे लेकर जो भ्रम फैलाया जा रहा है वह  कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों की चाल है।  उन्हें  भय सिर्फ इस बात का है कि यदि किसान खुले बाजार में अपनी उपज का विक्रय करने के लिये स्वतंत्र हो जायेगा तो उनको मंडी से मिलने वाले टैक्स और अन्य आय का जरिया समाप्त हो जायेगा| उन्हें किसानों की नही है बल्कि अपने खजाने की चिंता है। आश्चर्य की बात यह है कि कांग्रेस पार्टी ने स्वयं 2019 के लोकसभा चुनावों के समय जारी अपने घोषणापत्र में एपीएमसी (मंडी) कानून को बदलने की बात कही है। उन्होंने यह भी कहा है कि किसानों के व्यापार पर कोई कर नही होगा और साथ ही किसानों के अंतरराज्यीय व्यापार के लिये भी प्रावधानों की बात अपने घोषणा पत्र में कही है। वही कांग्रेस के लोग आज विधवा विलाप कर रहे हैं कि किसानों को बंधुआ मजदूर बनाने वाला कानून है। वास्तव में आज़ादी के इतने वर्ष बाद भी आज किसानों की हालत बंधुआ मजदूरों जैसी है जिसका जिम्मेदार कोई और नही बल्कि 70 साल तक देश में राज करने वाली कांग्रेस पार्टी ही है। एमएसपी की बात करने वाली कांग्रेस पार्टी खुद  केवल 15  क्विंटल  धान किसानों से खरीदती है बाकी का धान किसान 1100 से 1400 रु में बेचने को मजबूर है उस पर भी उसे टैक्स देना होता है। पहले राज्य सरकार यहां घोषणा करे  कि किसान का एक-एक दाना धान 2500 रु में खरीदेगी और उसका भुगतान भी किश्तों में न करके एकमुश्त करेगी। खुद को किसानों की हितैषी बताने वाली कांग्रेस स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशें लागू करने में क्यों असमर्थ रही जबकि मोदी की सरकार ने स्वामीनाथन आयोग की ज्यादातर सिफारिशों को किसानों के लिये लागू किया। धान की फसल के समर्थन मूल्य में 2014 के बाद से 43% तक वृद्धि की गयी। ज्यादातर उपज के लिये समर्थन मूल्य लागत से डेढ़ गुना या उससे ज्यादा कर दिया गया। किसानों को किसान सम्मान निधि का लाभ मोदी की सरकार ने दिया। आज जब किसानों के लिये विकास के द्वार इस नए कानून के माध्यम से केंद्र की मोदी सरकार ने खोल दिये हैं तो भोले भाले किसानों को काल्पनिक डर दिखाकर उन्हें गुमराह किया जा रहा है। वर्षों से धोखाधड़ी का शिकार इस देश का किसान यकीन नही कर पा रहा है कोई ऐसी सरकार भी आएगी जो कृषक को विकास का इतना व्यापक अवसर उपलब्ध करा पायेगी। किसानों को अब जहाँ ज्यादा कीमत मिलेगी वो वहाँ अपनी फसल को बेच पायेंगे। किसी बड़े रेस्तरां किसी बड़े कारखाने से लेकर मल्टीनेशनल कंपनी तक बिना बिचौलियों के किसान सीधे अपनी फसल का सौदा कर सकेंगे। उन्हें उन्नत बीज, आधुनिक तकनीकी सहायता कृषि कार्य हेतु ऋण से लेकर फसल के स्वास्थ्य और उसके जोखिम तक बड़ी कंपनियां उठायेगी और उसके एवज में कोई किसान को उसकी जमीन से वंचित नही कर पाये| ऐसे भी प्रावधान कानून के अंदर किये गए हैं। श्री पवार ने कहा कि इस कानून को लेकर उच्च पदों पर बैठे जिले के कांग्रेस के ऐसे नेता अनर्गल बयानबाजी कर रहे हैं जिसका कृषि से कोई लेना-देना नही। श्री पवार ने चुनौती दी है कि कांग्रेस का कोई भी नेता किसानों के विषय में आमने-सामने बैठकर उससे खुली बहस कर सकता है|