कार्यशाला में दी गई जैपनीज इंसेफ्लाइटिस टीकाकरण की जानकारी, 23 से टीकाकरण प्रस्तावित

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धमतरी| स्वास्थ्य विभाग द्वारा जैपनीज इंसेफ्लाइटिस नामक बीमारी के उन्मूलन को लेकर टीकाकरण कार्यशाला का आयोजन मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय के सभाकक्ष में  किया  गया  जिसमें इसके कारण और टीकाकरण पर प्रकाश डाला गया। राज्य टीकाकरण अधिकारी डाॅ. ए.एस. साहू द्वारा बताया गया कि यह एक प्रकार का वायरल इंसेफलायटिस (मस्तिष्क ज्वर) है। फ्लैवी वायरस नामक विषाणु इंसानी शरीर को प्रभावित करता है। क्यूलेक्स मच्छर की प्रजाति इसे इंसानों में फैलाती है। संक्रमित मच्छर के काटने से बीमारी का फैलाव मलेरिया की तरह ही होता है। इसके विषाणु घरेलू पालतू जानवरों में पाए जाते हैं।
जैपनीज इंसेफ्लाइटिस के बारे में कार्यशाला में जानकारी देते हुए बताया गया कि भारत में दक्षिण के प्रदेशों में छिटपुट प्रकरणों की साल भर जानकारी मिलती है, लेकिन उत्तर भारत में महामारी के आउटबे्रक की तरह हर वर्ष गर्मी एवं मानसून में उभरता है। यह बीमारी मुख्य तौर पर बच्चों (1 वर्ष से 15 वर्ष) में होने की आशंका ज्यादा) होती है। हालांकि अन्य उम्र वाले भी इससे प्रभावित होते हैं।
खासकर ग्रामीण एवं अर्द्धशहरी इलाकों में इस बीमारी की आशंका ज्यादा होती है। कार्यशाला में यह भी बताया गया कि जैपनीज इंसेफ्लाइटिस (जे.ई.) से बच्चों में मृत्यु की आशंका 24 से 48 फीसदी तथा काॅम्प्लीकेशन होने पर 70 फीसदी बच्चों में मस्तिष्कीय विकलांगता की आशंका बढ़ जाती है। जिला टीकाकरण अधिकारी द्वारा जानकारी दी गई कि जैपनीज इंसेफलायटिस के नियंत्रण हेतु दो उपाय प्रमुख हैं। पहला प्रभावी मच्छर नियंत्रण कार्यक्रम और दूसरा बचाव हेतु टीकाकरण। यह भी बताया गया कि प्रदेश में टीकाकरण चार वर्ष पूर्व से ही सुकमा जिले में जारी है। भारत सरकार के दिशानिर्देशों के अनुरूप पांच जिलों दंतेवाड़ा, बीजापुर, जगदलपुर, कोंडागांव व धमतरी में भी इसका प्रभावी टीकाकरण कार्यक्रम अभियान 23 नवंबर  से 18 दिसंबर 2020 के बीच प्रस्तावित है। कार्यशाला में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डाॅ. डी.के. तुर्रे सहित वरिष्ठ चिकित्सक उपस्थित थे।