आई एफ डब्ल्यू जे ने प्रधानमंत्री से पत्रकारों के लिए 25 लाख रुपए का बीमा करवाने की मांग की

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आई एफ डब्ल्यू जे की प्रधानमंत्री को याचिका।
पत्रकारों की सुरक्षा हेतु।
नई दिल्ली | आई एफ डब्ल्यू जे ने  प्रधानमंत्री से आग्रह किया कि वह अपने ‘ सप्तपदी ‘ सात मंत्रो के छठवें मंत्र के अनुसार आर्थिक लाभ के भूखे मिडिया संस्थानों के मालिक उसकी पालना नहीं कर रहे हैं। डॉक्टर ,नर्स ,सफाई कर्मी , पुलिस की तरह ही पत्रकारों को भी समुचित सम्मान दिलवाए , जिसके वह अधिकारी है।


अपनी एक अपील में आई एफ डब्ल्यू जे संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री के विक्रम राव ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी से कहा है कि बड़ी संख्या में मिडिया हाउस के कर्ता धर्ता कर्मचारियों की छंटनी ,वेतन में कटौती, निलंबन एवं त्वरित तबादले प्रधानमंत्री की हार्दिक प्रार्थना की सरासर अवेहलना है।

14 अप्रैल को अपने राष्ट्र के नाम संदेश में श्री नरेन्द्र मोदी जी ने कर्मचारियों के लिए सहृदयता दिखाने की जो अपील की , परन्तु विशाल मिडिया हाउस अपने कर्मचारियों के प्रति असंवेदनशीलता दिखाते हुए उन्हें आजिविका के साधनों से फिर भी वंचित कर रहे हैं। पत्रकार यह कहने लगे हैं कि कोरोना ने देश वासियों को तो एक किटाणु के रुप में सताया है। परन्तु इन ह्दयहीन आकाओं ने उन्हें मनुष्य रुप में क्लेश / कष्ट / संताप दिया है। आई एफ डब्ल्यू जे ने यूनियन होम मिनिस्टर के उस निर्देश को भी याद दिलाया , जिसमें आपदा प्रबंधन एक्ट 2005 के तहत साफ कहा गया है।
” सभी नियोक्ता चाहें वे उधोग अथवा प्रतिष्ठानों के मालिक हैं ।या फिर अन्य किसी व्यवसायिक गतिविधि का नेतृत्व करते हो । अपने कर्मचारियों को बिना किसी कांट-छांट के अविलंब वेतन का भुगतान करेंगे। विशेषकर उन दिनों जबकि सरकारी आदेश से तालाबंदी लागू की गई हो ।”
परन्तु प्रेस जगत के इन स्वयं भू आकाओं ने सरासर इस निर्देश की अवेहलना करते हुए कर्मचारियों के वेतन एवं भुगतान में कटौती की है।
श्री के विक्रम राव ने यह भी याद दिलाया कि जब गुरूग्राम के एक अस्पताल सेंट स्टीफंस ने पांच कर्मचारियों को हटाया तो उनके बचाव में स्वयं श्रम एवं गृह मंत्रालय ने कर्मचारियों का पक्ष लेते हुए 11अप्रैल को सुनवाई के दौरान दिल्ली हाईकोर्ट में यह बताया कि श्रम मंत्रालय ने 20 एवं 23 मार्च को जारी की गई विज्ञप्ति में स्पष्ट निर्देशित किया है कि कोरोना वायरस के प्रकोप के चलते यदि तालाबंदी के दौरान किसी भी कर्मचारी को निकाला जाता है तो उसके नियोक्ता पर कानूनी कार्रवाई होगी।
फिर चाहे वह कर्मचारी अस्थायी हो या स्थायी , सरकारी हो या गैर सरकारी।
सरकार स्वयं उसके अधिकारों की रक्षा करेंगी।

श्री के विक्रम राव ने यह भी याद दिलाया कि 1977 में प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई के कार्यकाल में उन कर्मचारियों को जिनकी 1975-77 की एमरजेंसी के दौरान बड़े पैमाने पर छंटनी हुई थी, उनके लिए स्वयं मोरारजी देसाई ने यह सुनिश्चित कराया था कि सभी को पूर्ण भुगतान के साथ पुनः नियुक्त किया जाए।
उन दिनों को याद करते हुए उन्होंने कहा कि “मैं भी उन्ही में से एक था । जब टाइम्स आफ इंडिया के मालिकों ने मुझे फासीवादी प्रेस सेंसरशिप का विरोध करने पर हुई जेल के चलते काम से निकाल दिया था।”

कर्मचारियों के शोषण के विषय में उन्होंने यह भी बताया की 10 अप्रैल को न्यूज नेशन के 16 कर्मचारियों को यह कहकर बेदखल कर दिया गया कि,उनका शेष वेतन एक माह बाद कर दिया जाएगा।
वहीं टाइम्स आफ इंडिया ने अपने संडे मेगजीन के पुरे स्टाप को निकाल बाहर किया।
सकाल टाइम्स के 15 कर्मचारियों को इस्तीफा देने के लिए कहा गया है। क्यिट न्यूज़ के 45 कर्मचारियों को बिना वेतन छुट्टी पर जाने के लिए कहा गया है।
मुम्बई के हिंदी अखबार हमारा महानगर के 18 मार्च को बंद कर दिए जाने के समाचार है।
मेगजीन आउटलुक और न‌ई दुनिया के प्रकाशन भी बंद कर दिए गए हैं।
द इंडियन एक्सप्रेस और बिजनेस स्टेडर्ड ने अपने स्टाप को वेतन में कटौती स्वीकारने को कहा है।
कमोबेश यही खबरें सभी राज्यों से आ रही है।
उन पर जबरन कटौतियों को थोपा जा रहा है।
इन्ही सभी घटनाओं के चलते आई एफ डब्ल्यू जे ने प्रधानमंत्री से पत्रकारों के लिए 25 लाख रुपए का बीमा करवाने की मांग की।
यह बीमा जो संकटकाल में अग्रिम पंक्ति में खड़े सभी कर्मचारियों, जैसे स्वास्थ्य सेवा से जुड़े व्यक्तियों को मिलता है।

आई एफ डब्ल्यू जे चाहता है कि तुरंत प्रभाव से सभी बर्खास्त मिडिया कर्मचारीयों को बहाल किया जाए , निष्कासन आदेशों को रद्द किया जाए और रोजगार शर्तो के संबंध में वैधानिक प्रावधानों की अनुपालना की जाए।

आई एफ डब्ल्यू जे ने प्रधानमंत्री से उनके गृह एवं श्रम मंत्रियों के साथ एक त्रिपक्षीय वार्ता बैठक बुलाने का अनुरोध किया है ताकि मिडिया कर्मचारीयों के हितों की उनसे रक्षा की जा सके जो पत्रकारों की स्वतंत्रता एवं उनके मौलिक अधिकारों का हनन करता है , खतरे में डालता है।

संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री के विक्रम राव ,द्वारा प्रधानमंत्री से की गई अपील का
छत्तीसगढ़ इकाई समर्थन करती है