धमतरी में खाद की कालाबाजारी पर सख्ती, 120 बोरी यूरिया जब्त, एक उर्वरक विक्रेता का लाइसेंस निरस्त

1

कई कृषि केंद्रों में निरीक्षण, चार दुकानों को कारण बताओ नोटिस; जिले में 16,958.31 मीट्रिक टन उर्वरक उपलब्ध, किसानों से केवल अधिकृत विक्रेताओं से खरीदने की अपील

धमतरी। खरीफ मौसम में किसानों को समय पर खाद-उर्वरकों की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करने तथा कालाबाजारी, जमाखोरी एवं अनियमितताओं पर प्रभावी अंकुश लगाने के उद्देश्य से जिला प्रशासन धमतरी द्वारा सघन निरीक्षण अभियान चलाया जा रहा है। संचालक कृषि राहुल देव (भा.प्र.से.) के निर्देशन तथा कलेक्टर के मार्गदर्शन में कृषि विभाग की टीम जिलेभर में उर्वरक विक्रय केंद्रों की लगातार निगरानी कर रही है।
इसी क्रम में उप संचालक कृषि के निर्देशानुसार 2 जुलाई को अनुविभागीय कृषि अधिकारी धमतरी एवं विकासखंड स्तर पर गठित निरीक्षण दलों ने विभिन्न उर्वरक विक्रय केंद्रों का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान धमतरी विकासखंड के ग्राम दर्री स्थित अशोक ट्रेडर्स, हनुमान कृषि केन्द्र (खरेंगा), उपकार ट्रेडर्स (कण्डेल), पवन ट्रेडर्स (कण्डेल) एवं अंजनेय कृषि केन्द्र (झिरिया), कुरूद विकासखंड के चन्द्राकर कृषि केन्द्र (कुहकुहा), अजीत कृषि केन्द्र (दरबा), गुरुकृपा कृषि केन्द्र (सेमरा), नेतराम कृषि केन्द्र (मरौद), यदु कृषि केन्द्र (मुल्ले), शिवम कृषि केन्द्र, हनुमान कृषि केन्द्र (गुदगुदा), नीरज कृषि केन्द्र (सिर्री), प्रणव कृषि केन्द्र (थुहा) तथा मगरलोड विकासखंड के शिवम कृषि केन्द्र (भेण्डरी) एवं लोचन कृषि केन्द्र (बुड़ेनी) का निरीक्षण किया गया।
120 बोरी यूरिया जब्त, बिक्री पर लगाई रोक
निरीक्षण के दौरान मेसर्स वर्षा कृषि केन्द्र, भानपुरी में 120 बोरी यूरिया का अवैध भंडारण पाया गया। उर्वरक निरीक्षक ने तत्काल उक्त उर्वरक को जब्त कर उसके विक्रय पर प्रतिबंध लगा दिया। मामले की जानकारी कलेक्टर को दे दी गई है तथा उर्वरक नियंत्रण आदेश एवं आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत नियमानुसार अग्रिम कार्रवाई की जा रही है।
एक विक्रेता का लाइसेंस तत्काल प्रभाव से निरस्त
निरीक्षण में यह भी सामने आया कि मेसर्स अशोक ट्रेडर्स, दर्री को उर्वरक विक्रय का लाइसेंस मिलने के बावजूद पिछले दो वर्षों से उर्वरक व्यवसाय का संचालन नहीं किया जा रहा था। इसे उर्वरक नियंत्रण आदेश एवं आवश्यक वस्तु अधिनियम का उल्लंघन मानते हुए संबंधित प्रतिष्ठान का लाइसेंस आगामी आदेश तक तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया गया है।
चार दुकानों को कारण बताओ नोटिस
निरीक्षण के दौरान हनुमान कृषि केन्द्र (खरेंगा), उपकार ट्रेडर्स (कण्डेल), पवन ट्रेडर्स (कण्डेल) तथा अंजनेय कृषि केन्द्र (झिरिया) में विभिन्न अनियमितताएं पाए जाने पर संबंधित संचालकों को कारण बताओ नोटिस जारी कर निर्धारित अवधि में जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। प्राप्त जवाब के परीक्षण के बाद नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
31 अगस्त तक चलेगा उर्वरक विक्रय सतर्कता अभियान
कृषि विभाग द्वारा जिले में 1 जुलाई से 31 अगस्त 2026 तक ‘उर्वरक विक्रय सतर्कता अभियान’ संचालित किया जा रहा है। अभियान के तहत क्षेत्रीय अधिकारियों की ड्यूटी लगाई गई है, जो उर्वरकों की जमाखोरी, कालाबाजारी, टैगिंग, निर्धारित मूल्य से अधिक दर पर बिक्री, बिना पॉस मशीन के विक्रय तथा अन्य अनियमितताओं पर सतत निगरानी रखेंगे। किसी भी प्रकार की गड़बड़ी पाए जाने पर संबंधित विक्रेताओं के विरुद्ध कठोर वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
जिले में पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है खाद
कृषि विभाग के अनुसार जिले में किसानों की आवश्यकता के अनुरूप उर्वरकों का पर्याप्त भंडारण उपलब्ध है। वर्तमान में जिले में 7708.60 मीट्रिक टन यूरिया, 3787.00 मीट्रिक टन सुपर फॉस्फेट, 1534.88 मीट्रिक टन डीएपी, 815.67 मीट्रिक टन पोटाश तथा 3111.68 मीट्रिक टन एनपीके उपलब्ध है। इस प्रकार सहकारी समितियों एवं निजी विक्रय केंद्रों में कुल 16,958.31 मीट्रिक टन उर्वरक उपलब्ध है। इसके अलावा डबल लॉक उर्वरक संग्रहण केंद्रों में भी पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध है और आवश्यकता के अनुसार चरणबद्ध तरीके से अतिरिक्त भंडारण की व्यवस्था की जा रही है।
किसानों से प्रशासन की अपील
जिला प्रशासन ने किसानों से अपील की है कि वे केवल अधिकृत सहकारी समितियों एवं लाइसेंसधारी विक्रेताओं से ही उर्वरक खरीदें तथा प्रत्येक खरीद पर रसीद अवश्य लें। यदि कोई विक्रेता निर्धारित मूल्य से अधिक राशि वसूलता है, खाद के साथ अन्य सामग्री खरीदने के लिए बाध्य करता है, बिना पॉस मशीन के विक्रय करता है अथवा कृत्रिम अभाव उत्पन्न करने का प्रयास करता है, तो इसकी सूचना तत्काल कृषि विभाग या जिला प्रशासन को दें।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि खरीफ सीजन में किसानों को खाद-बीज की कमी नहीं होने दी जाएगी। शासन और जिला प्रशासन के समन्वित प्रयासों से उर्वरकों की नियमित उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है, ताकि किसान समय पर खेती कर अधिक उत्पादन प्राप्त कर सकें। किसानों के हितों की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और कालाबाजारी अथवा जमाखोरी करने वालों के विरुद्ध भविष्य में भी सख्त कार्रवाई लगातार जारी रहेगी।