वाल्मीकि समाज धमतरी के सावन महोत्सव और भोजली शोभा यात्रा में शामिल हुए – लेख राम साहू

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धमतरी | दिनांक 29 /8 /2026 को वाल्मीकि समाज धमतरी के तत्वाधान में सावन महोत्सव और भोजली शोभायात्रा का कार्यक्रम महर्षि वाल्मीकि मंदिर गणेश चौक धमतरी से सदर बाजार से मकई तालाब घड़ी चौक धमतरी तक रखा गया था
इस कार्यक्रम के आमंत्रण पाकर श्री लेख राम साहू पूर्व विधायक कुरूद एवं राष्ट्रीय समन्वयक पिछड़ा वर्ग कांग्रेस नई दिल्ली अपना सौभाग्य मानकर सावन महोत्सव और भोजली शोभायात्रा में शामिल हुए श्री लेख राम साहू लोगों को संदेश देते हुए कहा कि वाल्मीकि समाज के लोगों ने हम सबको रामायण का साक्षात दर्शन करा दिए निश्चित तौर पर हम सबको रामायण के रचयिता महर्षि वाल्मीकि जी की जीवन से प्रेरणा लेना चाहिए उन्होंने विषम परिस्थिति में भी अपने जीवन को सार्थक बना लिया |

महर्षि वाल्मीकि संस्कृत के पहले महाकाव्य ‘रामायण’ के रचयिता और ‘आदिकवि’ के रूप में प्रसिद्ध हैं। आदिकवि: महर्षि वाल्मीकि को संस्कृत साहित्य का प्रथम कवि (आदिकवि) माना जाता है क्योंकि उन्होंने दुनिया के पहले श्लोक और महाकाव्य की रचना की।

नारद मुनि से भेंट: नारद मुनि के उपदेश और ‘राम’ नाम के जाप से उनका जीवन पूरी तरह बदल गया। वे कठोर तपस्या में लीन हो गए, जिसके बाद उन्हें ‘वाल्मीकि’ नाम प्राप्त हुआ।

रामायण की रचना  प्रथम श्लोक: एक बार उन्होंने एक बहेलिया द्वारा क्रौंच पक्षी के जोड़े में से नर पक्षी के वध को देखा। मादा पक्षी के विलाप से द्रवित होकर उनके मुख से जो शोक-युक्त शब्द निकले, वही संस्कृत का पहला श्लोक बना। महाकाव्य: ब्रह्मजी की प्रेरणा से उन्होंने इसी श्लोक को आधार बनाकर २४,००० श्लोकों और सात कांडों वाले महाकाव्य रामायण की रचना की। महर्षि वाल्मीकि ने अपने आश्रम में माता सीता को आश्रय दिया था। उनके आश्रम में ही लव और कुश का जन्म हुआ और उन्होंने दोनों राजकुमारों को रामायण का ज्ञान दिया |

इस कार्यक्रम में विक्की वाल्मीकि अध्यक्ष वाल्मीकि कल्याण समाज धमतरी अविनाश मऱोठे अभी वाल्मीकि त्रिलोक वाल्मीकि आमिल आरा विकास संजू संतोष योगेश साक्षी वाल्मीकि सरोज वाल्मीकि सरस्वती वाल्मीकि सुशीला वाल्मीकि शशि वाल्मीकि जानी वाल्मीकि राजा वाल्मीकि पूर्व पार्षद राजेश पांडेय एवं समाज के अन्य लोग भी सम्मिलित हुए