धमतरी। जिले में बार-बार बिजली गुल होने और बढ़े हुए बिजली बिलों को लेकर उपभोक्ताओं की परेशानी बढ़ती जा रही है। उमस और गर्मी के बीच अघोषित बिजली कटौती से लोग हलाकान हैं। वहीं, स्मार्ट मीटर लगने के बाद बिजली बिल बढ़ने की शिकायतें भी सामने आ रही हैं। इसी बीच बिजली विभाग ने सोमवार को बकाया बिल की वसूली के लिए 25 सरकारी कार्यालयों और 150 निजी उपभोक्ताओं के कनेक्शन काट दिए।
विभाग की इस कार्रवाई के बाद उपभोक्ताओं का सवाल है कि बिल वसूली में जिस तरह सख्ती दिखाई जा रही है, उसी तरह बिजली आपूर्ति और बिलिंग व्यवस्था में सुधार क्यों नहीं हो रहा है। लोगों का कहना है कि समय पर बिल जमा करने के बावजूद बार-बार बिजली कटौती से घरेलू कामकाज के साथ छोटे कारोबार भी प्रभावित हो रहे हैं। खासकर रात के समय बिजली बंद होने से गर्मी और उमस के बीच लोगों के लिए सोना तक मुश्किल हो रहा है।
आटा चक्की संचालक संतोष यादव ने बताया कि दिनभर मेहनत करके दुकान चलाते हैं। कुछ दिन बिल जमा करने में देरी होने पर विभाग कनेक्शन काटने की चेतावनी देता है, लेकिन दिन में कई बार बिजली बंद होने से कारोबार प्रभावित होता है। उन्होंने कहा कि स्मार्ट मीटर की रीडिंग की जांच होनी चाहिए, ताकि उपभोक्ताओं को सही बिल मिल सके।
इसी तरह ममता देवांगन ने बताया कि स्मार्ट मीटर लगने के बाद उनके घर का बिजली बिल लगभग दोगुना हो गया है। घर में केवल पंखे और सामान्य लाइट का उपयोग होता है, इसके बावजूद हर महीने हजारों रुपये का बिल आ रहा है। उन्होंने कहा कि बढ़े हुए बिजली बिल से घरेलू बजट बिगड़ रहा है। दूसरी ओर, रात में बार-बार बिजली बंद होने से गर्मी में परेशानी और बढ़ जाती है।
विभाग ने बताया कटौती का कारण
ईई अनिल प्रसाद सोनी ने बताया कि जिले में करीब 1500 किलोमीटर बिजली लाइन है। कई स्थानों पर खुले तार और ट्रांसफार्मर हैं। शॉर्ट सर्किट, जंपर में खराबी और स्पार्किंग जैसी तकनीकी वजहों से बिजली आपूर्ति बाधित होती है। उन्होंने कहा कि ऐसी समस्याएं कई क्षेत्रों में सामने आती हैं।
बढ़े हुए बिजली बिल को लेकर उन्होंने बताया कि पहले 400 यूनिट तक हाफ बिजली बिल की सुविधा थी, जिसे शासन ने समाप्त कर दिया है। वर्तमान में 200 यूनिट तक हाफ बिजली बिल की सुविधा मिलती है। 200 यूनिट से अधिक खपत होने पर यह सुविधा समाप्त हो जाती है और दर बढ़ जाती है। उनके अनुसार, 200 यूनिट तक करीब 4.50 रुपये प्रति यूनिट की दर लागू होती है, जबकि 400 यूनिट तक पहुंचने पर दर करीब 6.50 रुपये प्रति यूनिट हो जाती है।
हालांकि, उपभोक्ताओं की शिकायत है कि बढ़े हुए बिजली बिल और बार-बार बिजली कटौती के बीच विभाग को बिलिंग की जांच, शिकायतों के निराकरण और आपूर्ति व्यवस्था पर भी जवाबदेही तय करनी चाहिए। उनका कहना है कि उपभोक्ताओं से समय पर भुगतान की अपेक्षा करने के साथ विभाग की जिम्मेदारी है कि उन्हें नियमित और गुणवत्तापूर्ण बिजली भी उपलब्ध कराई जाए।