धमतरी। छत्तीसगढ़ में आगामी धान खरीदी से ठीक पहले प्रदेशभर के पटवारियों की बेमियादी हड़ताल से पूरे राज्य की राजस्व व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है, जिसके चलते किसान बदहाली और भारी अनिश्चितता के दौर से गुजर रहे हैं। इस गंभीर संकट पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए जिला कांग्रेस कमेटी की अध्यक्ष तारिणी चंद्राकर ने साय सरकार की नीतियों को पूरी तरह किसान विरोधी करार दिया है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार की तानाशाही कार्यप्रणाली और संवादहीनता के कारण आज प्रदेश का अन्नदाता धान बेचने से पहले ही दाने-दाने के लिए मोहताज होने की कगार पर खड़ा है। तारिणी चंद्राकर ने कहा कि छत्तीसगढ़ में 13 अक्टूबर से प्रदेशभर के हजारों पटवारी नए ‘पीवी ऐप’ (फिजिकल वेरिफिकेशन ऐप) की तकनीकी खामियों, दमनकारी स्थानांतरण और निलंबन जैसी कार्रवाइयों के विरोध में अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। इस हड़ताल के कारण धान खरीदी से ठीक पहले होने वाली गिरदावरी, फसल सत्यापन और किसान पंजीयन का काम पूरी तरह ठप हो गया है। साय सरकार कर्मचारियों की जायज मांगों को सुनने और ऐप की व्यावहारिक दिक्कतों को दूर करने के बजाय तानाशाही रवैया अपनाए हुए है। सरकार की इस हठधर्मिता का सीधा नुकसान प्रदेश के भोले-भाले किसानों को भुगतना पड़ रहा है, जो तहसील और पटवारी कार्यालयों के चक्कर काटने को मजबूर हैं। जिला कांग्रेस अध्यक्ष ने साय सरकार की विफलता की तुलना पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार से करते हुए कहा कि भूपेश बघेल की सरकार में छत्तीसगढ़ का किसान हमेशा खुशहाल और केंद्र बिंदु में रहता था। उन्होंने बताया की राजीव गांधी किसान न्याय योजना के माध्यम से किसानों को इनपुट सब्सिडी देकर उनकी आर्थिक रीढ़ मजबूत की, जिससे धान का रिकॉर्ड उत्पादन हुआ। तत्काल कर्जमाफी और ₹2500 में धान खरीदकर किसानों को समृद्ध बनाया, कांग्रेस सरकार के समय गिरदावरी और पंजीयन की प्रक्रियाओं को किसानों की सहूलियत के हिसाब से बेहद सरल रखा गया था, ताकि किसी भी किसान को अपनी फसल बेचने के लिए परेशान न होना पड़े। तारिणी चंद्राकर ने आरोप लगाया कि वर्तमान भाजपा सरकार किसानों का धान खरीदने की इच्छुक ही नहीं दिख रही है। बार-बार नियमों को बदलना, गिरदावरी में जटिलताएं पैदा करना और अब बिना तैयारी के ‘पीवी ऐप’ थोपकर कर्मचारियों को हड़ताल पर जाने के लिए मजबूर करना, साय सरकार की किसान विरोधी मानसिकता को साफ दर्शाता है। कांग्रेस पार्टी ने साय सरकार से मांग की है कि वह तुरंत पटवारी संघ से सम्मानपूर्वक बातचीत कर हड़ताल समाप्त कराए और गिरदावरी की प्रक्रिया को बहाल कर किसानों का बिना किसी मानसिक प्रताड़ना के सुचारू रूप से धान खरीदना सुनिश्चित करे।
