धमतरी | जिले में विगत 3 दिनों से अनवरत बारिश का दौर चल रहा है। बंगाल की खाड़ी में बने चक्रवात तूफान के कारण जिले में भयंकर बारिश की स्थिति निर्मित हो गयी है। 3 दिन से हो रही झमाझम बारिश के कारण जिला शिक्षा अधिकारी के द्वारा आनान-फानन में विद्यालयों में छुट्टी घोषित की गई। छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन के जिला अध्यक्ष डॉ भूषण लाल चंद्राकर,सचिव बलराम तारम कोषाध्यक्ष कैलाश साहू एवं जिला प्रवक्ता कैलाश सोन ने बताया कि आदेश प्रसारित होने में 07:45 का समय हो चुका था जिसके कारण अधिकतर विद्यार्थी एवं शिक्षक अपनी जान जोखिम में डालकर विद्यालय पहुँच गए थे। अतिवृष्टि के कारण विद्यालय में अवकाश संबंधी आदेश का विलंब से प्रसारित होने के कारण विधार्थी एवं शिक्षक भीगते हुए विद्यालय पहुंच गए थे जिसके कारण छात्र छात्राओं को परेशानी हुई कई स्कूलों में बच्चे परीक्षा कक्ष में भी अपने बैठ गए थे तब उनको अवकाश कई जानकारी हुई , इस अनवरत बारिश को देखते हुए शनिवार को पूरे जिले में अवकाश रखने की मांग संघ द्वारा जिला प्रशासन से की गईं है। चक्रवात तूफान का असर पूरे छत्तीसगढ़ और ख़ासकर पड़ोसी राज्य उड़ीसा से लगा हुआ जिला होने के कारण बारिश धमतरी जिले ज्यादा असर देखने को मिल रहा है। प्रतिकूल मौसम को देखते हुए बस्तर संभाग में कल ही छुट्टी का आदेश जारी कर दिया गया था, किंतु धमतरी जिला के अधिकारी प्रतिकूल मौसम को देखते हुए भी चुप्पी साधे बैठे थे और जब स्थिति भयावह हुई तब आनन-फानन में आदेश जारी किया गया जिसके कारण लगभग सभी बच्चे और शिक्षक परीक्षा जैसे महत्वपूर्ण दिन होने के कारण नदी नाले को पार करते हुए बारिश में भीगते स्कूल पहुंच गए थे।
पिछले कुछ दिनों से जिले में भारी वर्षा हो रही है, जिससे कई क्षेत्रों में जलभराव, सड़कें बंद तथा आवागमन में गंभीर बाधा उत्पन्न हुई है। ऐसी आपात स्थिति में बच्चों की सुरक्षा सर्वोपरि होनी चाहिए। इसके बावजूद शिक्षा विभाग एवं जिला प्रशासन द्वारा समय पर छुट्टी के स्पष्ट आदेश जारी नहीं किए गए। आदेशों में हुई इस लेट-लतीफी से शिक्षकों, अभिभावकों और विद्यार्थियों में त्रैमासिक परीक्षा होने के कारण बच्चे परीक्षा में अनुपस्थित ना हो जाए इस डर से अपनी जान को जोखिम में डालकर विद्यालय में उपस्थित रहे, जिससे उनकी सुरक्षा खतरे में पड़ी। प्राकृतिक आपदा के समय निर्णय लेने में देरी न केवल विद्यार्थियों के जीवन को जोखिम में डालती है, बल्कि शिक्षकों पर भी अतिरिक्त मानसिक दबाव डालती है।
एसोसिएशन ने स्पष्ट कहा है | भविष्य में अतिवृष्टि या किसी भी आपात स्थिति में छुट्टी संबंधी आदेश तुरंत एवं स्पष्ट रूप से सभी विद्यालयों तक प्रसारित किए जाएं। बच्चों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए एक स्पष्ट आपदा प्रबंधन प्रोटोकॉल तैयार किया जाए जिससे शिक्षकों एवं विद्यार्थियों की सुरक्षा के प्रति गंभीरता दिखाएं और ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न होने दें।
