भारत में ISIS की ब्रांच खोलने के आरोप में 15 लोगों को पटियाला हाउस कोर्ट ने सुनाई सजा

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नई दिल्ली| कुख्यात आतंकवादी संगठन आईएसआईएस की भारत में शाखा खोलकर खोलने और युवाओं को बरगला कर उसमें शामिल करने की साजिश के आरोप में दिल्ली की पटियाला हाउस अदालत ने आईएसआईएस के कथित 15 सहयोगियों को सजा सुना दी है. इन लोगों को क्रमशः 10 साल, 7 साल ,5 साल की कारावास के अलावा जुर्माने की सजा भी दी गई है. एनआईए के मुताबिक अपने आप में यह पहला मामला था जो आईएसआईएस की उस आतंकवादी थ्योरी पर काम कर रहा था जैसा साल 2014 में आईएसआईएस के आका चाहते थे. एनआईए के एक आला अधिकारी के मुताबिक यह मामला साल 2015 में विभिन्न आपराधिक धाराओं के तहत दर्ज किया गया था इस मामले में आरोप था कि कुछ लोग आतंकी संगठन आईएसआईएस के इशारे पर भारत में उसका एक सहयोगी संगठन तैयार कर रहे हैं. जिसका नाम जुनेद उल खलीफा रखा गया था और इसके कर्ता-धर्ता भारत के भोले भाले युवकों को गुमराह कर सोशल मीडिया वेबसाइट के जरिए आतंकी बनाने और भर्ती करने का काम कर रहे थे. सूचना के आधार पर कार्रवाई करते हुए एनआईए ने इस मामले में कुल 19 लोगों की गिरफ्तारी की थी यह भी पता चला कि इस संगठन के भारतीय का आईएसआईएस के सरगना कहे जाने वाले लोगों में से यूसुफ अल हिंदी उर्फ अरमान उर्फ अनजान भाई के इशारे पर यह काम कर रहे थे यह शख्स आईएसआईएस का मीडिया प्रमुख बताया जाता था. एनआईए के आला अधिकारी के मुताबिक इन लोगों की गिरफ्तारी के बाद इस संगठन को फैलने और आतंकी घटनाओं और ना होने देने पर रोक लगाई जा सकी. क्योंकि इस संगठन में कई ऐसे लोग भी जुड़ रहे थे जो धर्म के नाम पर आतंक मचाना चाहते थे. इन लोगों की गिरफ्तारी के बाद से अनेक ऐसे लोगों का पता चला जो आईएसआईएस में शामिल होने के लिए मिडिल ईस्ट देशों में पहुंच चुके थे लेकिन इस मामले की जांच के खुलासे के दौरान इनमें से अनेक लोगों को पकड़ लिया गया और वापस भारत लाया गया. एनआईए ने इस मामले में साल 2016 – 17 में कुल 16 आरोपियों के खिलाफ अपना आरोप पत्र पटियाला हाउस कोर्ट में विशेष एनआईए जज के सामने पेश किया था एनआईए के मुताबिक विशेष एनआईए अदालत ने इस मामले में चली सुनवाई तथा तथ्यों के आधार पर कुल 15 आरोपियों को सजा सुना दी है .