पितृपक्ष प्रारंभ, पितरों की शांति के लिए किया तर्पण 

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धमतरी |गणेश उत्सव पर्व के बाद आज से पितृपक्ष का शुभारंभ हो गया |पितरों की शांति के लिए लोगों ने तालाबों, नदी में तर्पण किया गया | पितृ पक्ष पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए श्राद्ध और तर्पण करने का विधान है | इस संबंध में बोड़रा निवासी ओंकार साहू ने बताया कि श्राद्ध तर्पण करने से कोई भी व्यक्ति पितृ दोष से मुक्त हो सकता है | उन्होंने बताया कि सुबह से स्नान कर तालाब किनारे जल अर्पण करते हैं | घर आंगन की लिपाई कर पीढ़ा के ऊपर चावल दाल दातुन रखकर पूर्वजों का स्वागत करते हैं |इस दौरान किए गए श्राद्ध कर्म से पितरों को तृप्ति मिलती है | वह खुश होकरअपने वंशजों को सुखी और संपन्न होने का आशीर्वाद देते हैं |

संबलपुर निवासी लोकेश कुमार ने बताया कि श्राद्ध का अर्थ श्रद्धापूर्वक अपने पितरों को प्रसन्न करने से है। जो परिजन अपना देह त्यागकर चले गए हैं, उनकी आत्मा की तृप्ति के लिए सच्ची श्रद्धा के साथ जो तर्पण किया जाता है, उसे श्राद्ध कहा जाता है। पितृपक्ष में मृत्युलोक से पितर पृथ्वी पर आते है और अपने परिवार के लोगों को आशीर्वाद देते हैं। पितृपक्ष में पितरों की आत्मा की शांति के लिए उनको तर्पण किया जाता है। पितरों के प्रसन्न होने पर घर पर सुख शान्ति आती है।

पितृपक्ष में पितरों के निमित्त पिंडदान, तर्पण और हवन आदि किया जाता है। सभी लोग अपने-अपने पूर्वजों की मृत्यु तिथि के अनुसार उनका श्राद्ध करते हैं। माना जाता है कि जो लोग पितृपक्ष में पितरों का तर्पण नहीं करते उन्‍हें पितृदोष लगता है। श्राद्ध करने से उनकी आत्‍मा को तृप्ति और शांति मिलती है।