प्रभारी सचिव श्रीमती शम्मी आबिदी ने जी-जामगांव आंगनवाड़ी केंद्र का किया निरीक्षण पोषण, प्रारंभिक शिक्षा एवं मॉनिटरिंग व्यवस्था सुदृढ़ करने दिए निर्देश

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धमतरी | सचिव, महिला एवं बाल विकास तथा जिले की प्रभारी सचिव श्रीमती शम्मी आबिदी ने  प्रातः धमतरी जिले के ग्राम जी-जामगांव स्थित आंगनवाड़ी केंद्र का निरीक्षण किया। इस अवसर पर कलेक्टर श्री अबिनाश मिश्रा. मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री गजेन्द्र ठाकुर, एसडीएम कुरूद श्री नभ सिंह कोसले,सहित महिला एवं बाल विकास, अधिकारी उपस्थित थे । प्रभारी सचिव सर्वप्रथम आंगनवाड़ी केंद्र पहुंचीं और बच्चों की उपस्थिति, पूरक पोषण आहार की गुणवत्ता, साफ-सफाई एवं केंद्र के समुचित रखरखाव का बारीकी से अवलोकन किया। उन्होंने बच्चों का वजन एवं ऊंचाई मापन, कुपोषित बच्चों की स्थिति तथा पोषण ट्रैकिंग की जानकारी लेते हुए नियमित मॉनिटरिंग एवं समयबद्ध फॉलोअप सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। गर्म भोजन की गुणवत्ता के संबंध में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं एवं सहायिकाओं से चर्चा कर पोषण स्तर में निरंतर सुधार पर विशेष बल दिया। निरीक्षण के दौरान प्रभारी सचिव बच्चों के बीच फर्श पर बैठकर आत्मीय संवाद करती नजर आईं। उन्होंने बच्चों से कविता सुनी, उनके नाम, परिवार एवं गांव की जानकारी ली तथा उनका उत्साहवर्धन किया। बच्ची वाणी, हार्दिक एवं काव्य ने उत्साहपूर्वक कविता सुनाई, जिसकी सचिव ने सराहना की। उन्होंने कहा कि 5-6 वर्ष आयु के बच्चों को विद्यालय प्रवेश से पूर्व बुनियादी विषयों – मैं और मेरा परिवार’, ‘मेरा घर और गाँव’, ‘आंगनवाड़ी’, ‘पशु-पक्षी’, ‘फल-सब्जियाँ’, ‘जीव-जंतु’, ‘हवा-पानी’, ‘मौसम और त्यौहार’, ‘बाज़ार’, ‘यातायात के साधन’ एवं ‘हमारे सहायक’ आदि की समुचित जानकारी दी जानी चाहिए, ताकि उनका सर्वांगीण बौद्धिक, सामाजिक एवं भावनात्मक विकास सुनिश्चित हो सके। उन्होंने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को निर्देशित किया कि बच्चों को प्रारंभिक शिक्षा के माध्यम से शरीर के अंगों, पारिवारिक संबंधों, ऋतु परिवर्तन एवं दैनिक जीवन से जुड़े व्यावहारिक ज्ञान से अवगत कराया जाए। उन्होंने 0 से 3 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों की संख्या, उनकी शारीरिक स्थिति, कुपोषित बच्चों की पहचान एवं स्वास्थ्य संबंधी विवरण की जानकारी ली। साथ ही केंद्र में संचालित दैनिक गतिविधियों के टाइम-टेबल, बच्चों के प्रारंभिक ज्ञान स्तर एवं गतिविधि पुस्तिका के अनुरूप शिक्षण प्रक्रिया की समीक्षा की। उन्होंने निर्देशित किया कि बच्चों को खेल-आधारित एवं गतिविधि-आधारित शिक्षण पद्धति के माध्यम से विद्यालय के लिए तैयार किया जाए। प्रभारी सचिव ने केंद्र में वितरित किए जा रहे नाश्ता एवं भोजन, रेडी-टू-ईट सामग्री, पोषण ट्रैकर, उपस्थिति पंजी तथा उपलब्ध उपकरणों की स्थिति की भी जांच की। उन्होंने गुणवत्तायुक्त एवं संतुलित आहार उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान रसोईघर का अवलोकन कर स्वच्छता मानकों का पालन सुनिश्चित करने कहा। साथ ही केंद्र परिसर में ‘पोषण वाटिका’ विकसित करने के निर्देश दिए, जिससे बच्चों को ताजे एवं पौष्टिक खाद्य पदार्थ उपलब्ध हो सकें और सामुदायिक सहभागिता भी बढ़े। उन्होंने ग्राम चर्रा में बाला (Building as Learning Aid) कॉन्सेप्ट पर निर्मित आंगनवाड़ी केंद्र के डिज़ाइन की सराहना करते हुए सचिव ने इसका ड्राइंग उपलब्ध कराने के निर्देश दिए, ताकि इसी मॉडल को प्रदेश के अन्य जिलों में भी अपनाया जा सके। उन्होंने कहा कि आकर्षक एवं शिक्षण-सहायक अधोसंरचना बच्चों की सीखने की क्षमता को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। निरीक्षण के अंत में सचिव द्वारा बच्चों को चिक्की एवं चॉकलेट वितरित की गई, जिससे बच्चों में उत्साह एवं प्रसन्नता का वातावरण देखने को मिला। उन्होंने कहा कि शासन की प्राथमिकता है कि प्रत्येक आंगनवाड़ी केंद्र बच्चों के समग्र विकास, पोषण सुरक्षा एवं गुणवत्तापूर्ण प्रारंभिक शिक्षा का सशक्त केंद्र बने।