
धमतरी । गंगा दशहरा के पावन अवसर पर धमतरी स्थित मां विंध्यवासिनी बिलाई माता मंदिर परिसर में श्रद्धा, भक्ति और सांस्कृतिक पुनर्जागरण का अनूठा संगम देखने को मिला। वर्षों से बंद पड़ी ऐतिहासिक बावली को पुनर्जीवित करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए, नगरवासियों ने अपने घरों से पवित्र गंगा जल लाकर बावली में अर्पित किया। यह दृश्य न केवल आस्था से ओतप्रोत था, बल्कि जनसहभागिता और पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दे रहा था। नगर के महापौर श्री रामू रोहरा ने भी इस पुण्य कार्य में भाग लेते हुए गंगा जल का संचरण किया और भावुक स्वर में कहा, “मां विंध्यवासिनी की कृपा से धमतरी नगर में चारों ओर सुख, समृद्धि और शांति है। इस ऐतिहासिक बावली का पुनरुत्थान न केवल एक धार्मिक अनुष्ठान है, बल्कि यह जल संरक्षण और सांस्कृतिक विरासत को सहेजने का श्रेष्ठ प्रयास भी है।” मंदिर ट्रस्ट द्वारा वर्षों से मलबे में दबी बावली की खुदाई कर उसके मूल स्वरूप को यथावत बनाए रखते हुए, सीढ़ियों और जलाशय की मरम्मत की गई है। यह कार्य न केवल श्रद्धालुओं की भावनाओं का सम्मान है, बल्कि नगर की सांस्कृतिक पहचान को जीवित रखने का भी प्रयास है। गंगा दशहरा, जो मां गंगा के अवतरण का पावन दिन है, उसी शुभ घड़ी पर बावली में गंगा, नर्मदा, शिवनाथ और अन्य पवित्र जलस्रोतों का जल मंत्रोच्चार के साथ अर्पित किया गया। यह जल संचरण न केवल बावली को पुनर्जीवन देने का कार्य था, बल्कि नगर की समृद्धि, सुख-शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा को पुनः जागृत करने का प्रतीक भी बना। ट्रस्ट ने सभी नगरवासियों से इस कार्य में भागीदारी की अपील की है, जिससे यह स्थान भविष्य में धार्मिक पर्यटन, पर्यावरण संरक्षण और सामुदायिक एकता का केंद्र बन सके।






