तर्रागोंदी में 5 कुण्डीय गायत्री महायज्ञ संपन्न, संस्कारों के माध्यम से दिया उज्ज्वल समाज निर्माण का संदेश

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धमतरी/तर्रागोंदी। अखिल विश्व गायत्री परिवार शांतिकुंज के तत्वावधान में ग्राम तर्रागोंदी में आयोजित चार दिवसीय ‘अखंड ज्योति शताब्दी वर्ष’ एवं शक्ति संवर्धन 5 कुण्डीय गायत्री महायज्ञ व प्रज्ञा पुराण कथा का भव्य एवं आध्यात्मिक वातावरण में समापन हुआ। परम पूज्य गुरुदेव पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य एवं माता भगवती देवी शर्मा के सूक्ष्म संरक्षण में आयोजित इस कार्यक्रम ने पूरे क्षेत्र को आध्यात्मिक ऊर्जा से ओतप्रोत कर दिया।
 मां गायत्री की महिमा का हुआ विस्तार से वर्णन
शांतिकुंज प्रतिनिधि एवं प्रज्ञा पुत्र भोलेश्वर कुमार ने प्रज्ञा पुराण कथा के माध्यम से आदिशक्ति मां गायत्री एवं देवमाता के दिव्य स्वरूप पर प्रकाश डाला। उन्होंने ब्रह्मर्षि विश्वामित्र और चारों वेदों में वर्णित गायत्री मंत्र की महिमा बताते हुए कहा कि सद्बुद्धि प्रदान करने वाला यह मंत्र व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक और व्यापक परिवर्तन लाने की क्षमता रखता है।
चार दिनों तक चला आध्यात्मिक आयोजन
चार दिवसीय कार्यक्रम के दौरान विभिन्न धार्मिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियां आयोजित की गईं —
प्रथम दिवस: भव्य कलश यात्रा निकाली गई, जिसमें बड़ी संख्या में मातृशक्ति की सहभागिता रही।
द्वितीय दिवस: प्रज्ञा पुराण कथा के माध्यम से नैतिक मूल्यों और आदर्श जीवनशैली का संदेश दिया गया।
तृतीय दिवस: सतयुगीन पूजन पद्धति एवं देव संस्कृति के सरल स्वरूप पर विशेष चर्चा हुई।
अंतिम दिवस: महायज्ञ की पूर्णाहुति के साथ विभिन्न संस्कारों का नि:शुल्क आयोजन किया गया।
संस्कारों के माध्यम से समाज निर्माण का संदेश
अंतिम दिवस कुल 57 संस्कार संपन्न कराए गए, जिनमें शामिल हैं —
दीक्षा संस्कार — 24
मुंडन संस्कार — 15
विद्यारंभ संस्कार — 11
गर्भ (पुंसवन) संस्कार — 05
अन्नप्राशन संस्कार — 02
इन संस्कारों के माध्यम से समाज में नैतिकता, संस्कार और सांस्कृतिक मूल्यों को सुदृढ़ करने का संदेश दिया गया।
क्षेत्रभर से पहुंचे श्रद्धालु
प्रांतीय युवा प्रकोष्ठ के कौशल साहू ने बताया कि आयोजन में जगदेही, सिलौटी, सिलघाट, टीपानी, निपानी, मंडेली, सिलीडीह, कोर्रा, हंचलपुर तथा धमतरी सहित आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए।
कार्यक्रम में प्रांतीय एवं जिला संगठन से श्रीमती लक्ष्मी साहू, अनिल गजपाल, श्रीमती त्रिवेणी गजपाल, माखन लाल और सुभाषनी साहू विशेष रूप से उपस्थित रहे।
सफल आयोजन में सभी का योगदान
कार्यक्रम का मंच संचालन श्री संतराम निषाद ने किया। आयोजन को सफल बनाने में मानसिंह, गितेश्वर, हेमलाल सहित स्थानीय प्रज्ञा मंडल के सभी परिजनों का सराहनीय योगदान रहा।