
धमतरी में आयोजित जनसुनवाई में महिला आयोग ने कई मामलों का किया निराकरण, भरण-पोषण, अनुकंपा नियुक्ति और स्थानांतरण संबंधी दिए महत्वपूर्ण निर्देश।
धमतरी l छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डाॅ. किरणमयी नायक एवं प्रभारी सदस्य सुश्री दीपिका सोरी तथा सह-प्रभारी श्रीमती सरला कोसरिया ने धमतरी जिले के कलेक्टर सभाकक्ष में महिला उत्पीड़न से संबंधित प्रकरणों की जनसुनवाई की। आयोग की अध्यक्षता में आयोजित इस जनसुनवाई में प्रदेश स्तर पर यह 408वीं तथा धमतरी जिले में 13वीं जनसुनवाई रही। सुनवाई के दौरान कुल 32 प्रकरण रखे गए।
जनसुनवाई में कई मामलों का आपसी सहमति, समझाइश एवं आयोग के निर्देशों के आधार पर निराकरण किया गया।
सबसे प्रमुख प्रकरण में एक शासकीय शिक्षक की मृत्यु के बाद उनकी पुत्री को अनुकंपा नियुक्ति दिए जाने की आयोग ने अनुशंसा की। सुनवाई के दौरान पाया गया कि आवेदिका अपने दिवंगत पिता की प्रथम पत्नी की पुत्री है तथा वर्तमान में अपनी दादी के साथ रह रही है। पिता के निधन के बाद उसके एवं उसकी दादी के भरण-पोषण का कोई साधन नहीं है। दूसरी ओर सौतेली माता को पारिवारिक पेंशन मिलने की पात्रता है।
आयोग ने मामले की सुनवाई के बाद अनुशंसा की कि आवेदिका को उसके पिता के स्थान पर अनुकंपा नियुक्ति प्रदान की जाए तथा अनावेदिका को नियमानुसार पारिवारिक पेंशन दी जाए। आयोग ने जिला शिक्षा अधिकारी, कांकेर को दो माह के भीतर कार्रवाई कर प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। साथ ही महिला संरक्षण अधिकारी, कांकेर को प्रक्रिया की निगरानी की जिम्मेदारी सौंपी गई।
एक अन्य प्रकरण में आयोग की समझाइश पर अनावेदक ने 07 जुलाई 2026 को कलेक्टर, जिला धमतरी के समक्ष आवेदिका को तीन लाख रुपये एकमुश्त देने पर सहमति व्यक्त की। इस राशि के भुगतान की निगरानी महिला संरक्षण अधिकारी करेंगे। यदि निर्धारित समय में राशि का भुगतान नहीं किया जाता है तो आवेदिका को न्यायालय में दिवानी वाद प्रस्तुत करने की स्वतंत्रता रहेगी।
जिला शिक्षा विभाग से जुड़े एक मामले में आयोग ने दोनों पक्षों के बयान सुनने के बाद जिला शिक्षा अधिकारी, कांकेर को निर्देश दिए कि दोनों कर्मचारियों का बागोडार विकासखंड को छोड़कर कांकेर जिले के किसी अन्य विकासखंड में तत्काल प्रभाव से स्थानांतरण किया जाए, ताकि विवाद का स्थायी समाधान हो सके। साथ ही सभी शिकायतों का अंतिम निराकरण कर आयोग को रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए।
एक अन्य मामले में आयोग ने निर्देश दिए कि आवेदिका का बकाया वेतन शीघ्र भुगतान किया जाए तथा उसे डाटा एंट्री ऑपरेटर के अतिरिक्त अन्य कार्यों के लिए बाध्य न किया जाए। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि आदेशों का पालन नहीं किया गया तो संबंधित विभागीय कार्रवाई के लिए शासन को पत्र भेजा जाएगा।
पति की मृत्यु के बाद भरण-पोषण से संबंधित एक मामले में आयोग की समझाइश पर अनावेदक प्रतिमाह 10 हजार रुपये भरण-पोषण राशि देने तथा विवाह का सामान एवं शेष सामग्री वापस करने के लिए तैयार हुआ। जो सामान बेचा जा चुका है, उसकी कीमत भी आवेदिका को देने पर सहमति बनी। आयोग ने धमतरी एवं कांकेर के सखी केंद्र तथा महिला संरक्षण अधिकारियों को पूरे मामले की निगरानी, सामान वापस दिलाने तथा दो वर्ष तक अनुपालन सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी सौंपी।
एक अन्य प्रकरण में न्यायालय में मामला लंबित होने के बावजूद आयोग की समझाइश पर अनावेदक अपने दोनों बच्चों के लिए प्रतिमाह दो-दो हजार रुपये भरण-पोषण राशि देने के लिए तैयार हुआ। दोनों पक्षों ने आपसी सहमति से तलाक की प्रक्रिया आगे बढ़ाने की भी जानकारी दी।
इसके अतिरिक्त जनसुनवाई के दौरान कई अन्य मामलों में पक्षकारों के बीच समझौता होने, न्यायालय में प्रकरण लंबित होने अथवा एफआईआर दर्ज होने के कारण संबंधित प्रकरणों का आयोग द्वारा नियमानुसार निस्तारण किया गया। आयोग ने आवश्यकतानुसार संबंधित जिला प्रशासन, महिला संरक्षण अधिकारियों एवं सखी केंद्रों को अनुपालन सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए।






