जनदर्शन में फूटा ‘आवास’ का गुस्सा, पात्र परिवारों ने लगाए भेदभाव के आरोप

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धमतरी के कई गांवों से पहुंचे ग्रामीणों ने कहा- पात्र होने के बावजूद काट दिया नाम, अपात्रों को मिला प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ;  जांच के निर्देश

धमतरी। प्रधानमंत्री आवास योजना के क्रियान्वयन को लेकर धमतरी जिले में एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। मंगलवार को आयोजित जनदर्शन में जिले के विभिन्न गांवों से पहुंचे ग्रामीणों ने योजना में अनियमितता और पक्षपात का आरोप लगाते हुए कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। ग्रामीणों का कहना था कि पात्र होने के बावजूद उन्हें योजना का लाभ नहीं मिला, जबकि कई अपात्र लोगों के नाम सूची में शामिल कर उन्हें आवास स्वीकृत कर दिए गए।
कलेक्टर कार्यालय पहुंचे शिकायतकर्ताओं में जोरातराई, बोरसी, सांकरा, धौराभाठा, भोथली सहित अन्य गांवों के ग्रामीण शामिल थे। उनका कहना था कि प्रारंभिक सर्वे के दौरान उनके नाम दर्ज किए गए थे, लेकिन अंतिम पात्रता सूची जारी होने पर बिना किसी कारण उन्हें सूची से बाहर कर दिया गया। इसके कारण आज भी कई गरीब परिवार कच्चे और जर्जर मकानों में रहने को मजबूर हैं।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि कुछ ग्राम पंचायतों में पात्रता के नियमों की अनदेखी कर आर्थिक रूप से सक्षम लोगों को प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ दे दिया गया। वहीं, कुछ मामलों में एक ही परिवार के एक से अधिक सदस्यों को भी योजना का लाभ मिलने की शिकायत जनदर्शन में की गई।
ग्राम पंचायत जोरातराई निवासी मोतीराम साहू ने आरोप लगाया कि गांव में कई ऐसे परिवार हैं, जिन्हें एक से अधिक बार योजना का लाभ मिला है। उनका कहना है कि जिन लोगों के पास पहले से पक्के मकान हैं, उन्हें भी आवास स्वीकृत कर दिया गया, जबकि वास्तविक जरूरतमंद गरीब परिवार अब भी सूची से बाहर हैं। उन्होंने योजना के क्रियान्वयन में सरपंच और रोजगार सहायक की भूमिका पर भी सवाल उठाए।
वहीं शिकायतकर्ता ठाकुर राम ने बताया कि प्रारंभिक सर्वे में उनका नाम पात्र सूची में शामिल था, लेकिन अंतिम सूची जारी होने पर नाम हटा दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि इस संबंध में पूछने पर कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला। उन्होंने यह भी दावा किया कि गांव में आवास स्वीकृत कराने के नाम पर कुछ लोगों से पैसों की मांग की गई। हालांकि इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
जनदर्शन में सामने आई इन शिकायतों के बाद प्रधानमंत्री आवास योजना के क्रियान्वयन पर कई सवाल उठने लगे हैं। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यदि पात्र लोगों के नाम सूची से हटाए गए हैं और अपात्रों को लाभ मिला है तो इसकी निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की जानी चाहिए।
कलेक्टर कार्यालय ने सभी शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए जांच के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों ने बताया कि मामलों की जांच जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी से कराई जाएगी। जिन मामलों का संबंध राज्य स्तर से होगा, उन्हें शासन को भेजा जाएगा। अब ग्रामीणों की निगाहें जांच रिपोर्ट और उसके बाद होने वाली कार्रवाई पर टिकी हैं।