हजारों आदिवासियों ने घेरा कलेक्टोरेट, सड़क-पुल-बिजली समेत मूलभूत सुविधाओं की मांग पर अड़े

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धमतरी l उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व क्षेत्र में बसे लगभग 55 गांव के तीन से चार हजार से अधिक आदिवासी जल, जंगल, जमीन संघर्ष समिति के बैनर तले अपने क्षेत्र के मूलभूत सुविधाओं समेत कई मांगों को लेकर सोमवार को कलेक्टोरेट घेरने पहुंचे। आदिवासियों की भीड़ का सैलाब को पुलिस फोर्स ने रोककर बातचीत करने की कोशिश की मगर वे कलेक्टर से मिलने के लिए अड़े रहे।

सीतानदी-उदंती टाइगर रिजर्व क्षेत्र के अंतर्गत 55 गांवों में मूलभूत सुविधाओं की कमी है। कई विकास कार्य अधूरे पड़े हुए हैं। दुरस्थ गांवों का संपर्क मुख्य मार्ग से नहीं है। अरसी कन्हार से गरहाडीह जंक्शन तक 25 किमी पक्की सड़क गहनामसियार से जोरातराई तक 25 किमी सड़क, खल्लारी से चमेंदा तक 5 किमी पक्की सड़क, डेनही एवं बेलबाहरा के सभी गांवों तक पक्की सड़क, खल्लारी से नवागांव तक 5 किमी सड़क, देवरी और बेलरबाहरा के आश्रित गांवों तक पक्की सड़क, बोरई, लिखमा, कटट्टीगांव, बहीगांव के सभी आश्रित गांवों तक पक्की सड़क, खल्लारी से लिखमा तक 15 किमी सड़क निर्माण, आधा मांझी से बुढ़ारा तक पक्की सड़क 4 किमी जरूरी है। ग्रामीणों ने कहा कि उजरावन के पास सोंढूर नदी पर 80 मीटर का पुल, खल्लारी के पास गर्रांजी नदी पर पुल निर्माण, कर्रा पड़ाव नदी पर पुल, बेलर से बोरई रोड तक पुल निर्माण करने की मांग की गई है। धमतरी जिले के ग्राम पंचायत रिसगांव, करही, खल्लारी, फरसगांव, नवागांव, लिलांज के आश्रित गांवों में पर्याप्त बिजली सुविधा नहीं है। उन्होंने कहा कि सांकरा में आयोजित सुशासन शिविर के दौरान वन परिक्षेत्र अधिकारी रिसगांव द्वारा गोड़ी धर्म और आदिवासी समाज को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। आदिवासी समाज की भावनाएं आहत हुई है। उक्त अधिकारी को निलंबित करने की मांग भी की। अधिकारियों की मनमानी एवं दमनात्मक कार्यवाहियों पर अंकुश लगाने आदिवासी क्षेत्रों के संवैधानिक अधिकार पेशा एक्ट 1996 के धारा 4 (1) एफआरए 206 एवं पारंपरिक अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित की जाये। वन ग्राम से राजस्व ग्राम में परिवर्तित सभी ग्रामीणों को भूईयां पोर्टल में सुधारकर भूमि स्वामी अधिकार प्रदान किया जाये। सिविल अस्पताल में स्वीकृत सेटअप के अनुसार डाक्टरों एवं स्टॉफों की नियुक्ति किया जाये।

सीतानदी-उदंती अभ्यारण्य क्षेत्र के ग्रामीण विभिन्न वाहनों के माध्यम से धमतरी पहुंचे। ग्रामीणों ने नारेबाजी करते हुए पैदल मार्च कर कलेक्टोरेट के लिए आगे बढ़े। पहले तो उन्हें रोककर चर्चा करने की कोशिश की गई। इसके बाद ग्रामीणों के सैलाब को पुलिस ने कलेक्टोरेट मोड़ जनपद पंचायत के सामने रोक दिया। रैली का नेतृत्व जल, जंगल, जमीन समिति के प्रमुख नरेश मांझी, मनोज साक्षी, रेवाप्रसाद देवदास, सुभाष सोरी, महेन्द्र कुमार, निर्मल कुमार, बुधराम, जितेन्द्र, महेश कुमार, मनोज कुमार नेताम, ललित कुमार आदि हैं। उन्होंने कहा कि नगरी में एसडीएम को अपनी समस्याओं से अवगत कराया था। लेकिन वहां समस्या का समाधान नहीं होने पर वे कलेक्टोरेट घेरने आये हैं। इस प्रदर्शन में सहयोगी संगठन किसान संघर्ष समिति जोन बेलरबाहरा, अभ्यारण्य संघर्ष समिति क्षेत्र रिसगांव, अभ्यारण्य संघर्ष समिति क्षेत्र बहीगांव, जयअम्बेडकर वादी युवा संगठन राजापड़ाव क्षेत्र गरियाबंद, किसान मजदूर संघर्ष समिति क्षेत्र उदंती गरियाबंद, परिवर्तित राजस्व ग्राम समिति जिला गरियाबंद के सदस्य शामिल हुए। जिसमें 35 गांव धमतरी जिले एवं 20 गांव गरियाबंद जिले के लोग शामिल हुए हैं।

आंदोलनकारियों का कहना है कि अभी उनकी मांग पूरी नहीं हुई तो आगे परिवार समेत प्रदर्शन करने के लिए आएंगे। अभी वे भोजन पानी लेकर साथ चल रहे हैं। प्रदर्शनकारी कलेक्टर से सीधे संवाद पर अड़े रहे धमतरी के कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने संवेदनशीलता का परिचय देते हुए आंदोलन कारियों से मिलने पहुंचे

कलेक्टर ने किया प्रदर्शनकारियों से सीधा संवाद 

ग्रामीणों के डेलिगेट्स के साथ सकारात्मक माहौल में चर्चा हुई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि टाइगर रिज़र्व क्षेत्र होने के कारण कुछ विकास कार्यों में वन विभाग के कड़े नियम और कानून आड़े आते हैं, लेकिन प्रशासन नियमों के दायरे में रहकर बीच का रास्ता निकालने का प्रयास कर रहा है।

क्षेत्र में कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने के लिए पुलों (ब्रिज) के निर्माण को लेकर माननीय मुख्यमंत्री द्वारा पहले ही सहमति दी जा चुकी है, जिस पर जल्द ही काम शुरू किया जाएगा। इसके साथ ही कुछ चिन्हित सड़कों की बाधाओं को दूर कर उनका रास्ता भी साफ किया जा रहा है। एक साल के भीतर पूरे होंगे कई कार्य l

इन प्रमुख मुद्दों पर बनी सहमति:

पुल और सड़क निर्माण: आवागमन को सुगम बनाने के लिए पुल-पुलिया निर्माण पर पूर्ण सहमति।

मोबाइल टावर: क्षेत्र में नेटवर्क की समस्या को दूर करने के लिए टावर लगाने पर रज़ामंदी।

संबंधित अधिकारी/स्टाफ का ट्रांसफर: ग्रामीणों की शिकायत पर संबंधित विभाग के ट्रांसफर से जुड़े मामले का पत्र शासन को भेजा जा चुका है।

प्रशासन ने ग्रामीणों को आश्वासन दिया है कि उनकी सभी जायज़ और जनहित से जुड़ी माँगों को प्राथमिकता के आधार पर चरणबद्ध तरीके से पूरा किया जाएगा।