
धमतरी। सिहावा मार्ग पर चलना मानो जान हथेली पर लेकर चलना है। जगह-जगह गहरे गड्ढे, हर ओर फैला कीचड़ और जर्जर सड़कें हालात इतने भयावह हैं कि यहां से गुजरना खतरे से खेलने के बराबर हो गया है।
सिहावा चौक से कोलियारी और उसके आगे तक सड़क की हालत देख किसी भी जिम्मेदार अफसर या ठेकेदार का जमीर जागना चाहिए। बारिश के दिनों में गड्ढों में पानी भर जाता है, वाहन चालक गहराई का अंदाजा नहीं लगा पाते और आए दिन हादसों का शिकार हो जाते हैं। बारिश न हो तो धूल का ऐसा गुबार उड़ता है कि लोग सांस तक नहीं ले पाते।
धीमी रफ्तार से रेंगता निर्माण
वर्षों से लोग सड़क चौड़ीकरण और निर्माण की मांग कर रहे थे। आखिरकार स्वीकृति तो मिली लेकिन निर्माण कार्य कछुए की चाल से आगे बढ़ रहा है। आधा-अधूरा काम लोगों के लिए और भी सिरदर्द बन चुका है। सवाल यह है कि क्या जनता की जान से खेलना ही अब प्रशासन का नया नियम बन गया है?
व्यापार और स्वास्थ्य पर सीधा वार
सिहावा रोड अब व्यापारिक और रिहायशी हब बन चुका है। सैकड़ों दुकानें, गोदाम और कॉलोनियां विकसित हो चुकी हैं। यातायात का दबाव बढ़ता जा रहा है, मगर सड़क की हालत साल दर साल बदतर हो रही है। बरसात में दुकानों के बाहर कीचड़ का अंबार लग जाता है, ग्राहक दुकान तक पहुंचने से कतराते हैं और व्यापार चौपट हो रहा है।
लोगों का कहना है कि धूल और गंदगी के कारण लगातार बीमारियां बढ़ रही हैं। छोटे बच्चे और बुजुर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। यह हालात किसी आफत से कम नहीं।
जनता की सीधी मांग – ड्रेन टू ड्रेन सड़क निर्माण
लोगों ने साफ कहा है कि अब आधे-अधूरे पैबंद नहीं चाहिए। सिहावा रोड का निर्माण ड्रेन-टू-ड्रेन होना अनिवार्य है। तभी धूल, गड्ढे और कीचड़ से राहत मिलेगी।






