Home Latest स्वरोजगार एवं आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते सार्थक के विशेष बच्चे

स्वरोजगार एवं आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते सार्थक के विशेष बच्चे

विशेष बच्चों की हस्तनिर्मित राखियों की प्रदर्शनी एवं विक्रय शीघ्र, सहयोग के लिए नागरिकों से अपील

धमतरी | सार्थक स्कूल धमतरी में विशेष बच्चों को स्वरोजगार एवं आत्मनिर्भरता से जोड़ने के उद्देश्य से निरंतर व्यावसायिक प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है। इसी क्रम में विद्यालय में बच्चों को पारंपरिक एवं आकर्षक हस्तनिर्मित राखियां बनाने का प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण के दौरान बच्चों ने धागों, मोतियों, ब्रोच, वीरा, फ्लावर, कार्टून एवं अन्य सजावटी सामग्रियों का उपयोग करते हुए सुंदर एवं आकर्षक राखियां तैयार कीं।

सार्थक स्कूल की अध्यक्ष डॉ. सरिता दोशी ने बताया कि, संस्था का उद्देश्य विशेष बच्चों को उनकी रुचि एवं क्षमता के अनुरूप व्यावसायिक प्रशिक्षण देकर आत्मनिर्भर बनाना है। बच्चों द्वारा निर्मित उत्पादों के विक्रय से प्राप्त राशि का उपयोग उनके प्रशिक्षण, आवश्यक शिक्षण सामग्री तथा अन्य कल्याणकारी गतिविधियों में किया जाता है। इससे बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ता है और वे सम्मानपूर्वक स्वावलंबन की ओर अग्रसर होते हैं।

प्रशिक्षक मैथिली गोड़े, देविका दीवान, कौशल्या यादव एवं काजल रजक ने बच्चों को अत्यंत सरल एवं रोचक तरीके से पारंपरिक राखियां बनाना सिखाया। उन्होंने बताया कि बच्चे पूरे उत्साह, लगन और रचनात्मकता के साथ प्रशिक्षण ले रहे हैं तथा प्रतिदिन नई-नई डिज़ाइन की राखियां तैयार कर रहे हैं।राखियों के साथ-साथ बच्चों को उनकी रुचि एवं क्षमता के अनुसार तिरंगा बैज, शगुन के लिफाफे, पेपर बैग्स, आरती की थालियाँ तथा अन्य हस्तनिर्मित सजावटी एवं उपयोगी सामग्री बनाने एवं उन्हें आकर्षक ढंग से सजाने का प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है, ताकि भविष्य में वे अपने कौशल के माध्यम से स्वरोजगार के अवसर प्राप्त कर सकें।संस्था की सचिव स्नेहा राठौड़ ने बताया कि आगामी दिनों में विशेष बच्चों द्वारा तैयार की गई हस्तनिर्मित कलाकृतियों की प्रदर्शनी एवं विक्रय आयोजित किया जाएगा। उन्होंने नागरिकों से इन उत्पादों का क्रय कर विशेष बच्चों के हुनर को प्रोत्साहित करने का आग्रह किया।

प्रशिक्षकों ने बताया कि, बच्चों की सीखने की गति, रचनात्मकता और उत्साह अत्यंत प्रेरणादायक है। बच्चों ने अपनी-अपनी भाषा में खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि हमें राखियां और अन्य कलात्मक वस्तुएँ बनाना बहुत अच्छा लग रहा है, यह काम हमें बहुत मज़ेदार लगता है। और वे आगे भी नई-नई चीज़ें सीखना चाहते हैं। इस प्रशिक्षण में यज्ञदत्त, मोनिका, ईशु, प्रीति, वत्सला, मनीषा, प्राची, एकलव्य, श्वेता, देवश्री, निखिल, रोशन, दीपाली, डॉली, कुलदीप, करण, मनीष, नेमेश एवं विनीत सहित अनेक बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर विभिन्न आकर्षक डिज़ाइनों की राखियां तैयार कीं। संस्था का मानना है कि ऐसे व्यावसायिक प्रशिक्षण विशेष बच्चों के व्यक्तित्व विकास, आत्मविश्वास और आत्मनिर्भर भविष्य के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

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