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मनरेगा के तहत मिले विभिन्न कार्यों से प्रवासी श्रमिकों की आर्थिक व्यवस्था हुई सुदृढ़

प्रवासी श्रमिकों की आर्थिक व्यवस्था हुई सुदृढ़,मनरेगा के तहत मिले विभिन्न कार्यों से

धमतरी| ग्रामीण श्रमिकों के लिए महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना आर्थिक समृद्धि का वरदान साबित हुई है। लाॅकडाउन के चलते मजदूर पूरी तरह से बेरोजगार हो गये थे। ऐसे स्थिति में उन्हें रोजगार देने का काम सिर्फ मनरेगा ने ही किया है। एक ओर संक्रमण से बचने पूरा देश लाॅकडाउन था, दूसरी ओर मजदूरों के हाथों में मनेरगा ही आजीविका अर्जित करने का सबसे सशक्त माध्यम था। बरसात के समय खेती किसानी का काम करने के बाद गर्मी में मजदूर पूरी तरह से खाली हो गये थे। इनकी अर्थव्यवस्था प्रभावित हो रही थी इसलिए शासन ने मनरेगा के माध्यम से प्रवासी श्रमिकों को रोजगार देना शुरू किया।

धमतरी विकासखंड के 67 प्रवासी श्रमिकों में से 16 श्रमिकों ने तालाब गहरीकरण, मिट्टी सड़क, नाला सफाई कार्य में 412 दिवस का कार्य कर 78 हजार 280 रूपये की मजदूरी प्राप्त किया। कुरूद विकासखंड के 49 प्रवासी श्रमिकों में से 47 श्रमिकों को तालाब गहरीकरण, वृक्षारोपण कार्य, मिट्टी मुरूम सड़क, नाला सफाई, धरसा सड़क निर्माण, मिनी स्टेडियम, मिश्रित वृक्षारोपण कार्य, पशुशेड निर्माण, धान चबूतरा निर्माण, निर्मला घाट एवं डबरी निर्माण कार्य में 586 दिवस का रोजगार प्रदाय कर 01 लाख 11 हजार 340 रूपये की राशि भुगतान की गई। मगरलोड विकासखंड के 16 प्रवासी श्रमिकों ने भूमि सुधार कार्य, डबरी निर्माण कार्य, मिट्टी सड़क निर्माण कार्य, आक्सीजोन वृक्षारोपण कार्य, नया तालाब निर्माण कार्य, तालाब गहरीकरण कार्य, नाला सफाई कार्य में 268 दिन का रोजगार दिया गया जिसके एवज में 50 हजार 920 रूपये की मजदूरी भुगतान किया गया। नगरी विकासखंड के 162 श्रमिकों को भूमि सुधार, तालाब गहरीकरण सह पचरी एवं निर्मलाघाट निर्माण, मिट्टी सड़क निर्माण, नाला सफाई एवं गाद निकासी कार्य, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन हेतु शेड निर्माण कार्य, पशुशेड निर्माण कार्य, नवीन आंगनबाड़ी भवन निर्माण कार्य, बाजार शेड, चबूतरा, युरिनल डस्टबिन निर्माण कार्य कुंआ निर्माण कार्य में 4536 दिवस कार्य अर्जित कर 08 लाख 61 हजार 844 रूपये का भुगतान किया गया।
धमतरी विकासखंड के ग्राम पंचायत सेमरा (बी) के प्रवासी श्रमिक श्री लेखराम जाॅबकार्ड नंबर ब्भ्.330.09.001.029.001ध्01  ने बताया कि-लाॅकडाउन के समय वह उड़ीसा प्रांत के फरसाबुड़ा में भवन निर्माण कार्य में गये थे। श्रमिक भी अपने सुविधानुसार घर लौटने लगे। रोजगार न होने से आजीविका चलाने में दिक्कते हो रही थी। ग्राम पंचायत में काम के लिए आवेदन लगाया। उन्होंने बताया कि मांग एवं क्षमतानुसार मुझे तालाब गहरीकरण, सड़क निर्माण एवं पचरीकरण निर्माण कार्य में कुल 81 दिन का काम देकर 15 हजार 390 रूपये का भुगतान किया गया। अच्छे खासे मेहनताना मिलने से संकट के समय में भटकना नहीं पड़ा।
इसी तरह नगरी विकासखंड के ग्राम पंचायत भोथापारा निवासी राजकुमार ने 65 दिन, जैतपुरी के कृष्णा ने 60 दिन,  सांकरा के टाकेश्वर कुमार साहू ने 56 दिन कुम्हड़ा के भागीरथी ने 56 दिन, कोलियारी के शैलन्द्री नेताम ने 56 दिन, बेलरबाहरा के देवकी बाई ने 56 दिन एवं जबर्रा के कमलेश्वर कुमार ने 55 दिवस का कार्य कर समयावधि में मजदूरी प्राप्त कर चरमरा रही अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ किये।
वहीं नगरी विकासखंड के ग्राम पंचायत झुंझराकसा निवासी श्री रूपसिंह नेताम, जाॅबकार्ड ब्भ्3309003028001ध्319 मेट पंजीयन 15727 ने जिला जांजगीर चांपा में पिछले 01 साल से जैविक खाद निर्माण कंपनी में काम करता था। 22 मार्च 2020 को जब पूरे भारत भर में कोरोना वायरस कोविड-19 के दौरान लाॅकडाउन हुआ तब इनके समक्ष आर्थिक संकट गहराने लगा। वर्ष 2020-21 में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के अन्य मजदूरों की तरह जून माह में रूपसिंह को 14 दिन का काम मिला। जांजगीर चांपा में रहते हुए श्री नेताम वर्मी खाद बनाने के गुर सीखे थे। इसलिए गांव में इन्हें कौशल विकास के तहत् एफ.आर.ए. भूमि में वृक्षारोपण कार्य में काम करने का अवसर मिला। इनकी कार्य दक्षता को देखते हुए गांव में अकुशल श्रम के अलावा कौशल विकास के आधार पर मेट का काम दिया गया। इस तरह श्री रूपसिंह नेताम को  27 दिवस की मजदूरी 05 हजार 130 रूपये परिवार का सहारा बना।
झुंझराकसा सरपंच श्रीमती कलेश्वरी मरकाम ने बताया कि-कोरोना वायरस कोविड-19 के मद्देनजर ग्रामीणों को गांव में ही महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत् काम दिया गया। श्रमिकों को फेसमास्क या गमछा लगाकर कार्य करने, सोशल डिस्टेसिंग का पालन व हाथ की स्वच्छता हेतु साबुन व सेनेटाइजर का उपयोग करते हुए काम दिया गया। लाॅकडाउन लगने से ग्रामीण श्रमिकों की स्थिति अव्यवस्थित थे। प्रवासी श्रमिकों को कार्य देकर आर्थिक रूप से उन्हें लाभान्वित किया गया।

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