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भव रोग को मिटाने पर्वाधिराज पर्यूषण पर्व आया है – डॉ श्री बिंदुप्रभा जी म.सा.

चातुर्मास के अंतर्गत पर्यूषण पर्व के तहत स्थानक भवन में रोजाना दिया जा रहा मंगल प्रवचन
प्रवचन उपरांत रोजाना हो रहे विभिन्न धार्मिक प्रतियोगिताएं
धमतरी । सिहावा चौक स्थित  जैन स्थानक भवन में महासती डॉ  बिंदुप्रभा जी म.सा. ठाणा 2 द्वारा मंगल प्रवचन दिया जा रहा है। जिसके तहत आज पर्यूषण पर्व के चौथे दिन उन्होंने कहा कि हृदय रूपी आंगन में पर्यूषण पर्व की आस्था को उतारना है। दान, तप, शील और मोक्ष चार आराधना दिवस हैं। तप की महिमा का कल भी व्याख्यान दिया गया था और आज भी तप की महिमा का बखान करते हुए साध्वी  ने कहा कि तप से कर्मों की निर्जरा होती है और तप से कर्म के बंधन कटते हैं। तप और जप से जीवन को पावन बनाएं और पर्यूषण पर्व को जीवन में धारण करें। भव रोग को मिटाने पर्वाधिराज पर्यूषण पर्व आया है। भव रोग ने हमें अनादिकाल से जकड़ रखा है और इसे दूर करने का उपाय है भावनाशील बनना। भावनाशील से तात्पर्य है कि भ अर्थात भातृत्व का भाव (भाईचारा), व से वस्तुओं का दान करना, न से नाम की चाह न रखना, श से शीश झुक जाना, ल से धर्म के प्रति ललकता।

प्रवचन के पश्चात रोजाना प्रतियोगिताएं हो रही हैं जिसके तहत आज सवाल अजब और जवाब गजब प्रतियोगिता हुई। दोपहर को कल्पसूत्र का वाचन हुआ। फिर नवकार का करो ध्यान प्रतियोगिता हुई। क्षमायाचना कार्ड 29 अगस्त तक जमा कराना है व अंतगड सूत्र प्रश्रपत्र 30 अगस्त तक वंदना चौरडिय़ा के पास जमा कराने की अपील की गई है। वर्धमान स्थानकवासी संघ द्वारा सामूहिक एकासने का आयोजन किया जा रहा है जिसमें बड़ी संख्या में समाजजन शामिल होकर धर्मलाभ ले रहे हैं। संघ के सदस्य अपना सहयोग भी प्रदान कर रहे हैं। 12 घंटे का नवकार जाप भी जारी है। प्रतियोगिता के दौरान भी महिलाओं की बड़ी संख्या में उपस्थिति रहती है। आज रेखा छाजेड़ ने 5 उपवास, नीलम बैद 4 उपवास का, भंवरी चौरडिय़ा 4 उपवास का प्रत्याख्यान लिया। वहीं तेले की लड़ी में अभी तक लगभग 34 लोगों ने तेले के तप किये हैं और यह लड़ी निरंतर जारी है। कल 28 अगस्त को आचार्य सम्राट 1008  शुभचंद्र जी म.सा. की पुण्यतिथि पर 9 लक्की ड्रा निकाले जाएंगे। इसके लाभार्थी खाँगटा निवासी उत्तमचंद जितेन्द्र कुमार दीपक कुमार कोठारी (राजस्थान) वाले हैं। प्रतिदिन प्रवचन में बाहर से भी लोग पहुंच रहे हैं और स्थानीय समाजजन भी उपस्थिति दे रहे हैं।

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