नगर पंचायत आमदी में कलेक्टर और एसडीएम द्वारा लोकतंत्र का अपमान — भाजपा के इशारे पर सरकारी कार्यक्रम को बना दिया राजनीतिक मंच

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 धमतरी | अभी नगर पंचायत आमदी में आयोजित “यूनिटी मार्च एवं आत्मनिर्भर भारत” कार्यक्रम में जिले के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी — कलेक्टर एवं एसडीएम — द्वारा आचरण की मर्यादा और लोकतांत्रिक मूल्यों का खुला उल्लंघन किया गया। यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि एक सरकारी आयोजन को प्रशासन ने भाजपा की चाटुकारिता का मंच बना दिया। जिले के कलेक्टर, जो एक आईएएस अधिकारी हैं, और एसडीएम, जो ऐसे आयोजनों के प्रोटोकॉल अधिकारी होते हैं, दोनों ने अपने संवैधानिक दायित्वों को दरकिनार करते हुए कार्यक्रम को पक्षपातपूर्ण ढंग से संचालित किया। नगर पंचायत आमदी विधायक का गृह ग्राम है, जहाँ जनता द्वारा चुने गए जनप्रतिनिधियों के प्रति इस प्रकार का अपमान निंदनीय है। कार्यक्रम के पोस्टर और मंच से विधायक एवं कांग्रेस जनप्रतिनिधियों की तस्वीरें जानबूझकर हटाई गईं, जो स्पष्ट रूप से द्वेषपूर्ण और राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित कदम है।इस पूरे मामले पर नगर पंचायत आमदी के नेता प्रतिपक्ष ऋषभ ठाकुर, पार्षद चितेंद्र साहू, ललिता पटेल और पारसमणि साहू सहित अन्य जनप्रतिनिधियों ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि कलेक्टर और एसडीएम जैसे वरिष्ठ अधिकारियों को लोकतांत्रिक संस्थाओं और जनप्रतिनिधियों के प्रोटोकॉल का भलीभांति ज्ञान होना चाहिए। आमदी जैसे संवेदनशील और राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण ग्राम में इस प्रकार की प्रशासनिक पक्षपातपूर्ण हरकत लोकतंत्र के लिए गंभीर चिंता का विषय है।

नेता प्रतिपक्ष ऋषभ ठाकुर ने कहा —  “यह बेहद शर्मनाक है कि प्रशासन भाजपा की भाषा बोलने लगा है। जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधियों की उपेक्षा कर, सरकारी कार्यक्रमों को एक राजनीतिक दल के प्रचार मंच में बदल देना लोकतंत्र का खुला अपमान है। सभी पार्षदों ने संयुक्त रूप से मांग की है कि शासन इस पूरे प्रकरण की जांच कर संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध कठोर कार्यवाही करे, ताकि भविष्य में कोई भी अधिकारी लोकतंत्र की मर्यादा को ठेस न पहुँचा सके।यह घटना न केवल जनप्रतिनिधियों का अपमान है, बल्कि जनता के विश्वास पर भी कुठाराघात है। लोकतंत्र में प्रशासन की भूमिका निष्पक्ष रहनी चाहिए — न कि किसी दल की कठपुतली बनकर काम करने की।