खुशियों को जीवन में आने का अवसर दो

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धमतरी | खुशियों को जीवन में आने का अवसर दो का छठवां दिवस राजयोग मेडिटेशन सीखने की विधि (गहन योग अनुभूति) 21 /4 /23 का शुभारंभ परमात्मा स्मृति, अतिथियों के स्वागत, एवं दीप प्रज्वलन के द्वारा किया गया |

“प्रातःकालीन सत्र में अतिथि के रूप में उपस्थित रहे  किशोर कश्यप जी (पटवारी ) दीपक गावडे जी (रेंजर बिरगुडी), रुकमणी मरकाम (पटवारी ),शिविर के मुख्य वक्ता राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी प्राजक्ता दीदी जी (वरिष्ठ राजयोगी शिक्षिका धमतरी) संध्या कालीन सत्र में अतिथि के रूप में उपस्थित रहे  रमेश सा‌वजी, प्रफुल्ल साहू, (प्रधानाचार्य सरस्वती शिशु मंदिर),श्रीमती प्रेमलता नागवंशी जी , हेमराज साहू( शिक्षक) श्रीमती माला साहू (शिक्षिका) श्रीमती कविता साहू ,श्रीमती वेदमाती गजेंद्र जी (सिस्टर) श्रीमती रमा राजपूत (शिक्षिका) कैलाश सोन (प्रधान पाठक), हेमंत आचार्य , श्रीमती सुलोचना साहू जी (सभापति जनपद पंचायत नगरी),श्रीमती हेमलता साहू जी( भाजपा जिला मंडल मंत्री ),श्रीमती किरण साहू (भाजपा कार्यकर्ता) ,श्रीमती उस तला मोहन (शिक्षिका ), डोमार सिंह ध्रुव (व्याख्याता), धीरू संजय रेड्डी (संकुल समन्वयक ),जसपाल खनूजा, सुरेंद्र लोन होर,  गिरीश जायसवाल , उत्तम सोनी , उमेश सोम , केपी साहू, भुनेश्वर साहू। ब्रम्हाकुमारी प्राजक्ता दीदी ने कहा कि राजयोग( गहन योग अनुभूति) ऐसे विधि है जो मन को सकारात्मक सोचने की कला सिखाती है और बुद्धि से सही निर्णय लेने की शक्ति मिलती है। राजयोग पूरी तरीके से मन की यात्रा है हमें मन बुद्धि का प्रयोग कर परमात्मा से संबंध जोड़ कर उससे सर्व गुण का अनुभव कर सकते हैं ,जो गुण आज हमें वर्तमान समय बहुत ही ज्यादा आवश्यक है जो हमें कहीं से भी सही तरीके से भी मिलना असंभव है वह सच्ची प्राप्ति परमात्मा से ही मिल सकती है और वह परमात्मा पिता निस्वार्थ भाव से हमें देने के लिए तैयार है उसके लिए हमें खुद को तैयार करना है लेने के लिए इसलिए स्वयं को आत्म समझ जब मन बुद्धि की तार उस परमात्मा से जोड़ते हैं तो हम आत्मा की बैटरी चार्ज हो जाती हैऔर जीवन में सच्ची सुख शांति खुशी का अनुभव होने लगता है और यह सिर्फ हमारे तक ही नहीं रहता इसका प्रभाव हमारे परिवार ,समाज और हमारे व्यक्तित्व पर बहुत गहरा असर पड़ता है इससे शारीरिक बीमारियां ठीक हो रहे हैं आज हम सबको मेडिटेशन राजयोग सीखने की बहुत ही आवश्यकता है क्योंकि दिन प्रतिदिन दुख अशांति बढ़ती ही जा रही है उससे अपने आप को करने का एकमात्र उपाय परमात्मा से स्वयं से भरपूर करना राजयोग एक ऐसी विधि है जो हमें जीवन जीने की कला सिखाता है।