
आधुनिक मशीनों पर प्रायोगिक प्रशिक्षण के माध्यम से फल-सब्जी, मशरूम एवं अनाज प्रसंस्करण की तकनीक सीख रहे पीएमएफएमई हितग्राही एवं स्व-सहायता समूह की महिलाएं
धमतरी । कृषि विज्ञान केंद्र, धमतरी में फल-सब्जी, मशरूम एवं अनाज प्रसंस्करण विषय पर आयोजित तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। प्रशिक्षण का उद्देश्य स्थानीय कृषि उपज का वैज्ञानिक एवं तकनीकी प्रसंस्करण कर उसके मूल्य संवर्धन, बेहतर विपणन तथा स्वरोजगार एवं उद्यमिता के अवसरों को बढ़ावा देना है। प्रशिक्षण में प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना (पीएमएफएमई) के हितग्राहियों तथा स्व-सहायता समूहों की महिलाओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।
इस प्रशिक्षण में तीस प्रतिभागियों का बैच था जिसमे PMFME योजना के हितग्राही एवं संबलपुर गॉव की महिलाए शामिल थी।
कार्यक्रम के नोडल अधिकारी एवं कृषि प्रसंस्करण एवं खाद्य अभियांत्रिकी विशेषज्ञ डॉ. अमित कुमार सिन्हा ने कृषि विज्ञान केंद्र में स्थापित माइक्रो फूड प्रोसेसिंग ट्रेनिंग-कम-इंक्यूबेशन सेंटर में उपलब्ध आधुनिक खाद्य प्रसंस्करण मशीनों, उनकी कार्यप्रणाली एवं उपयोग की विस्तृत जानकारी दी। प्रशिक्षण को केवल सैद्धांतिक जानकारी तक सीमित न रखते हुए प्रतिभागियों को मशीनों के संचालन तथा उत्पाद निर्माण का प्रत्यक्ष एवं प्रायोगिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
प्रशिक्षण के प्रथम दिवस प्रतिभागियों ने राइस नूडल्स एवं रागी नूडल्स तैयार करने की संपूर्ण प्रक्रिया सीखी। इसमें कच्चे माल के चयन, उचित मिश्रण, मशीन द्वारा नूडल्स तैयार करने, सुखाने, गुणवत्ता बनाए रखने तथा पैकेजिंग तक की प्रक्रिया का प्रदर्शन किया गया। प्रतिभागियों ने स्वयं मशीनों का संचालन करते हुए उत्पाद तैयार करने का अभ्यास किया, जिससे उन्हें उत्पादन प्रक्रिया की व्यावहारिक समझ प्राप्त हुई।
डॉ. अमित कुमार सिन्हा ने बताया कि प्रशिक्षण के आगामी सत्रों में राइस पास्ता, विभिन्न प्रकार के नूडल्स एवं पास्ता, मशरूम आधारित मूल्य संवर्धित उत्पाद तथा फल-सब्जियों एवं अनाज से तैयार होने वाले विभिन्न प्रसंस्कृत उत्पादों के निर्माण की तकनीक सिखाई जाएगी। प्रशिक्षण में मशीन संचालन के साथ-साथ गुणवत्ता नियंत्रण, खाद्य सुरक्षा, स्वच्छता, पैकेजिंग एवं उत्पाद की उपयोगिता जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। प्रतिभागियों को इस प्रकार प्रशिक्षित किया जा रहा है कि वे प्रशिक्षण उपरांत स्वयं लघु खाद्य प्रसंस्करण इकाई स्थापित कर सकें।
कृषि विज्ञान केंद्र की वैज्ञानिक डॉ. दीपिका चंद्रवंशी ने धमतरी जिले में उत्पादित विभिन्न फलों एवं सब्जियों के प्रसंस्करण तथा मूल्य संवर्धन की संभावनाओं पर जानकारी दी। उन्होंने बताया कि स्थानीय कृषि एवं उद्यानिकी उपज से अचार, प्रसंस्कृत खाद्य सामग्री, पेय पदार्थ तथा अन्य मूल्य संवर्धित उत्पाद तैयार कर किसानों, युवाओं एवं स्व-सहायता समूहों के लिए अतिरिक्त आय के अवसर सृजित किए जा सकते हैं।
केंद्र के एग्रोनॉमिस्ट डॉ. प्रेमलाल साहू ने धान्य एवं विभिन्न अनाजों के प्रसंस्करण तथा उनसे मूल्य संवर्धित उत्पाद तैयार करने की तकनीकों और संभावनाओं से प्रतिभागियों को अवगत कराया। वहीं जिला उद्योग केंद्र से उपस्थित डॉ. संदीप मेश्राम ने प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना के प्रावधानों, उपलब्ध सहायता, सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना तथा उद्यमिता विकास के अवसरों की जानकारी दी।
कार्यक्रम में डिप्टी कलेक्टर श्री मनोज मरकाम, जिला खाद्य अधिकारी श्री बी.के. कोराम तथा जिला उद्योग केंद्र से श्री प्रशांत चंद्राकर विशेष रूप से उपस्थित रहे। संपूर्ण प्रशिक्षण कार्यक्रम कृषि विज्ञान केंद्र, धमतरी के प्रमुख डॉ. ईश्वर सिंह के मार्गदर्शन में आयोजित किया जा रहा है। उन्होंने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि स्थानीय स्तर पर उपलब्ध कृषि एवं उद्यानिकी उपज का प्रसंस्करण एवं मूल्य संवर्धन कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाया जा सकता है। उन्होंने प्रतिभागियों से प्रशिक्षण का अधिकतम लाभ उठाकर इसे आयवर्धक गतिविधि एवं उद्यम के रूप में विकसित करने का आह्वान किया।
प्रशिक्षण कार्यक्रम के सफल संचालन में कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक एवं अधिकारी-कर्मचारियों का महत्वपूर्ण सहयोग रहा। इनमें डॉ. शक्ति वर्मा, डॉ. मनीषा खापर्डे, डॉ. नेहा गावड़े एवं रितिका ठाकुर सहित अन्य सदस्य शामिल रहे।
तीन दिवसीय प्रशिक्षण के माध्यम से प्रतिभागियों को आधुनिक खाद्य प्रसंस्करण तकनीक, मशीन संचालन, मूल्य संवर्धन, गुणवत्ता नियंत्रण, खाद्य सुरक्षा, पैकेजिंग एवं उद्यमिता विकास का व्यावहारिक ज्ञान प्रदान किया जा रहा है। इससे स्थानीय कृषि उपज को बाजार की मांग के अनुरूप तैयार कर किसानों एवं ग्रामीण परिवारों की आय में वृद्धि, महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण तथा स्थानीय स्तर पर रोजगार एवं स्वरोजगार के नए अवसरों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। प्रशिक्षण स्थानीय संसाधनों को स्थानीय उद्यमों में बदलने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है।






