राज्य शासन ने 6 करोड़ 14 लाख 90 हजार रुपये की दी प्रशासकीय स्वीकृति
गणेशघाट, जो धार्मिक आस्था का प्रमुख केंद्र है, अब पर्यटन की नई संभावनाओं से जुड़ेगा
श्रद्धालु और पर्यटक प्राकृतिक सौंदर्य, संस्कृति और परंपरा से रूबरू हो सकेंगे
धमतरी | जिला धमतरी अंतर्गत महानदी के उद्गम क्षेत्र फरसिंया से गणेशघाट तक महानदी के पुनरुद्धार हेतु कलेक्टर श्री अबिनाश मिश्रा के विशेष प्रयासों से संचालित “मां” (Mahanadi Awakening Abhiyan) अभियान के अंतर्गत महत्वपूर्ण विकास कार्यों को निरंतर गति मिल रही है। इसी क्रम में श्रृंगी ऋषि पर्वत स्थित महानदी उद्गम स्थल गणेशघाट के पास एनीकट कम काजवे निर्माण कार्य हेतु छत्तीसगढ़ शासन, जल संसाधन विभाग द्वारा राशि 6 करोड़ 14 लाख 90 हजार रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई है। ग्रामीणों की वर्षों पुरानी मांग पूरी क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों की वर्षों पुरानी मांग को पूर्ण करते हुए दी गई इस स्वीकृति से स्थानीय नागरिकों में हर्ष और उत्साह का वातावरण है। गणेशघाट स्थल, जो स्वयं धार्मिक आस्था का केंद्र है, अब एनीकट निर्माण के पश्चात पर्यटन की नई संभावनाओं का द्वार भी खोलेगा। यहाँ आने वाले श्रद्धालु एवं पर्यटक प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद लेने के साथ-साथ स्थानीय संस्कृति और परंपरा से भी रूबरू हो सकेंगे। किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को लाभ जल संसाधन विभाग धमतरी के कार्यपालन अभियंता श्री प्रदीप कुमार नादिया ने बताया कि एनीकट निर्माण से क्षेत्रीय कृषकों को सिंचाई की पर्याप्त सुविधा उपलब्ध होगी। इससे भू-जल स्तर में वृद्धि होगी और किसानों को अपनी फसलों के लिए पर्याप्त जल संसाधन मिल पाएंगे। परिणामस्वरूप कृषि उत्पादन बढ़ेगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। कलेक्टर श्री अबिनाश मिश्रा ने कहा कि “महानदी केवल जल का स्रोत नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति, आस्था और जीवन का आधार है। एनीकट निर्माण कार्य से न केवल किसानों को सिंचाई सुविधा मिलेगी बल्कि गणेशघाट क्षेत्र पर्यटन और धार्मिक दृष्टि से भी विकसित होगा। यह कार्य स्थानीय युवाओं के लिए भी रोजगार और स्वरोजगार की संभावनाएँ पैदा करेगा। हमारा प्रयास है कि महानदी उद्गम क्षेत्र का समग्र विकास हो और यह आने वाली पीढ़ियों के लिए गर्व का प्रतीक बने। आभार और उम्मीदें इस स्वीकृति पर क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों एवं ग्रामवासियों ने मुख्यमंत्री एवं जल संसाधन मंत्री का आभार व्यक्त किया है। जनमानस का कहना है कि यह एनीकट निर्माण निश्चित ही कृषि, पर्यटन और सांस्कृतिक विकास में मील का पत्थर साबित होगा।






