कोरोना से कृषि कानून तक, जानें पीएम मोदी के भाषण की 10 बड़ी बातें

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नई दिल्ली | प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को भारतीय वाणिज्य एवं उद्योग महासंघ (FICCI) की 93वीं वार्षिक आम बैठक (एजीएम) और वार्षिक सम्मेलन को संबोधित किया.  भाषण के दौरान पीएम मोदी ने कृषि आंदोलन के बीच फिर संकेत दे दिए हैं कि सरकार कृषि कानूनों को वापस नहीं लेगी. पीएम मोदी ने अपने संबोधन में कोरोना वैक्सीन, कृषि सुधार, ग्रामीण भारत और उद्योगपतियों से निवेश को लेकर बात की. आपको बताते हैं पीएम के संबोधन की 10 बड़ी बातें.

पीएम मोदी ने कहा कि साल 2020 में हमने काफी कुछ बदलते देखा है किसी टी20 मैच की तरह. भारत ने जिस तरह बीते कुछ महीनों में एकजुट होकर काम किया, नीतियां बनाईं, निर्णय लिए, उससे स्थितियां संभली हैं. इसे देख पूरी दुनिया हैरान है. कोरोना महामारी के समय भारत ने अपने नागरिकों के जीवन को सर्वोच्च प्राथमिकता दी, ज्यादा से ज्यादा लोगों का जीवन बचाया. आज इसका नतीजा देश भी देख रहा है और दुनिया भी देख रही है. इतने उतार-चढ़ाव से देश और दुनिया गुजरी है कि कुछ वर्षों बाद जब हम कोरोना काल को याद करेंगे तो शायद यकीन ही नहीं आएगा. लेकिन अच्छी बात ये रही कि जितनी तेजी से हालात बिगड़े, उतनी ही तेजी के साथ सुधार भी हो रहा है. किसान आंदोलन के बीच पीएम मोदी ने कहा कि नए कृषि कानून से निवेश के रास्ते खुलेंगे. हम कृषि से जुड़ी चीजों की दीवारें हटा रहे हैं. किसानों की समृद्धि से ही देश समृद्ध होगा. पीएम मोदी ने कहा, पिछले 6 सालों में दुनिया ने भारत में गजब का विश्वास दिखाया है. और ये विश्वास पिछले 6 महीनों में और भी मजबूत हुआ है. पीएम मोदी ने कहा कि चाहे वो FDI हो या फिर FPI विदेशी निवेशकों ने भारत में रिकॉर्ड निवेश किया और आगे भी कर रहे हैं. खेती में जितना निजी क्षेत्र के द्वारा निवेश किया जाना चाहिए था उतना निवेश नहीं किया गया. निजी क्षेत्र ने कृषि क्षेत्र को एक्सप्लोर नहीं किया. पीएम मोदी ने कहा कि कृषि क्षेत्र में निजी कंपनियां अच्छा काम कर रही हैं, लेकिन उन्हें और भी अच्छा काम करने की जरूरत है. भारत की मंडियों का आधुनिकीकरण हो रहा है. फसलों को मंडी के साथ बाजार में बेचने का विकल्प मिल रहा है. पीएम मोदी ने कहा कि देश में चौतरफा रिफॉर्म्स किए गए हैं. आज भारत में कॉरपोरेट टैक्स दुनिया में सबसे कम है. इंस्पेक्टर राज और टैक्स के जंजाल को पीछे छोड़कर भारत अपने उद्यमियों पर भरोसा कर रहा है और आगे बढ़ रहा है. जब एक सेक्टर विकसित करता है तो उसका विकास दूसरे सेक्टरों पर भी पड़ता है. पहले जो सरकारें थीं वो ब्रेड से लेकर केक भी खुद बनाती थीं, जिससे नुकसान हुआ. भारत में वैक्सीन को लेकर तेजी से काम हो रहा है. ये निश्चित है कि 21वीं सदी के भारत की ग्रोथ को गांव और छोटे शहर ही सपोर्ट करने वाले हैं. कारोबारियों को गांव और छोटे शहरों में निवेश का मौका बिल्कुल नहीं गंवाना चाहिए.

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